वाराणसी। देश की धार्मिक और संस्कृतिक राजधानी कही जाने वाली काशी नगरी पीएम मोदी का संसदीय क्षेत्र है। गलियों के इस शहर में सड़कों की चौड़ाई भी अधिक नहीं है। परियोजना पर भारी खर्च आयेगा और सफल रहे इसकी संभावना भी कम है। सम्भवत: यही कारण है कि यहां पर मेट्रो के लिए दोबारा सर्वे कराना पड़ रहा है। इस बीच वीडीए के सचिव विशाल सिंह ने इस बार के सर्वे में केबल कार के विकल्प को भी शामिल किया है। समूचे विश्व में केबिल कार परियोजना को सफलता पूर्वक तैयार करने वाली अस्ट्रिया की कंपनी डॉपल मेयर से इसकी खातिर सम्पर्क भी किया जा चुका है। केन्द्र में विश्व बैंक के लिए काम कर चुके विशाल सिंह की माने तो इसमें मेट्रो की तुलना में खर्च कम है और काशी के मूल स्वरूप से छेड़छाड़ किये बगैर आसानी से तैयार किया जा सकता है।

15 मीटर की उंचाई पर चलेगी केबिल कार

डॉपल मेयर के इंजीनियर ने जो खाका तैयार किया है उसके मुताबिक 15 मीटर की ऊंचाई पर इसे संचालित किया जायेगा। देखने में किसी बस की तरह दिखने वाली एक केबिल कार में 80 लोगों के बैठने की क्षमता होगी। खास यह कि 20 किलोमीटर के रूट पर इसे चलाने का जो स्वरूप तैयार किया जायेगा उसमें 150 से 200 करोड़ का खर्च आयेगा। सड़कों पर ट्रैफिक का लोड कम होगा और एक घंटे में 12 हजार लोगों को एक सिरे से दूसरे तक पहुंचाया जा सकेगा।

सिर्फ स्टेशन के लिए चाहेगी जगह

केबिल कार के पिलर के लिए कम स्थान की जरूरत होती है। इसमें सिर्फ जहां स्टेशन होंगे वहां पर ही जगह अधिक चाहेगी अन्यथा काम पिलर पर चलता रहेगा। यूरोप और यूएसए के पुराने शहरों में इसे सफलतापूर्वक चलाया जा रहा है। सर्वे कर रही राइट्स को इस बार केबिल कार के विकल्प पर ध्यान देने की हिदायत इस कारण से दी गयी है क्योंकि यह मैट्रो की तुलना में अधिक व्यवहारिक है। घनी आबादी वाले इलाको से भी इसे आसानी से चलाया जा सकता है।

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