लखनऊ। कानून-व्यवस्था को लेकर विपक्षी दल भले आरोप लगाये लेकिन योगी सरकार में शुरू हुए मुठभेड़ के सिलसिले से मामूली अपराधी ही नहीं बल्कि माफिया डान तक बौखला गये हैं। प्रदेश ही नहीं देश के दूसरे हिस्सों में सनसनीखेज वारदात को अंजाम देने वाले मुन्ना बजरंगी को भी ऐसी चिन्ता सता रही है। बजरंगी ने पहले कोर्ट में प्रार्थनापत्र दिया था और इसके बाद अपनी पत्नी सीमा सिंह को आगे किया है। सीमा सिंह शुक्रवार को यूपी प्रेस क्लब में मीडिया के सामने आयी तो एक तरफ आशंका जता रही थी तो दूसरी तरफ एसटीएफ के आला अफसरों पर आरोपों की बौछार। उनके साथ खुद को मुन्ना बजरंगी के वकील बताने वाले विकास श्रीवास्तव भी मौजूद थे। दरअसल विकास से ‘करीबी रिश्तेदारी’ है लेकिन प्रकट तौर पर वह वकील के रूप में सामने थे। सीमा सिंह का दावा था कि झांसी जेल में उनके पति प्रेम प्रकाश सिंह उर्फ मुन्ना बजरंगी को मारने की काफी समय से साजिश चल रही है।

एसटीएफ के आईजी पर मढ़े आरोप!

सीमा सिंह की माने तो निजी स्वार्थ के लिए उनके पति को फर्जी मुठभेड़ में मारने की साजिश में प्रभावशाली लोग ही नहीं बल्कि एसटीएफ के आईजी स्तर के अधिकारी शामिल हैं। इसके तहत 9 मार्च को कानपुर में तैनात इंस्पेक्टर घनश्याम यादव ने झांसी जेल जाकर एक दूसरे बंदी कमलेश को साथ मिलाकर पति को खाने में जहर देने की साजिश रची थी। इसकी शिकायत संबंधित कोर्ट, एनएचआरसी, एसटीएफ के उच्च अधिकारियों की सह पर 9 मार्च 2018 को कानपुर में तैनात निरीक्षक घनश्याम यादव झांसी जेल जाकर वहां के एक अन्य बंदी कमलेश को साथ मिलाकर उनके पति को खाने में जहर देने का षड्यंत्र भी किया गया था। इसकी शिकायत परिवारवालों ने विभिन्न न्यायालयों, मानवाधिकार, विभिन्न विभागों तथा प्रशासनिक अधिकारियों से भी की है लेकिन सुनवाई न होने के चलते पति की जान को खतरा बताया है।

मेडिकल बोर्ड की जांच के बाद से गरमाया है मामला

बताया जाता है कि मुन्ना बजरंगी मोहम्मदाबाद से भाजपा विधायक रहे कृष्णानंद राय समेत सात लोगों की हत्या का आरोपित है। सीबीआई कोर्ट में सुनवाई अंतिम चरण में। कई पेशियों पर मेडिकल गया था और प्रशासन ने पिछली तारिख पर इसकी पुनरावृत्ति देख बोर्ड का गठन कर जांच करायी तो पूरी तरह स्वस्थ निकला। इसके बाद से आरोपों का सिलसिला आरम्भ हुआ हो जो कोर्ट में लंबित होने के बाद मीडिया के संज्ञान में लाया गया है। खास यह कि अगले माह इस मामले की फिर से सुनवाई होनी है।

भाई को करीबी की हत्या का दिया हवाला

सीमा सिंह ने अपने भाई पुष्पजीत सिंह जो बजरंगी के मुकदमे की पैरवी कर रहे थे की हत्या भी सााजिश के तहत 5 मार्च 2016 को करने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि दो वर्षों तक जांच के नाम पर टालमटोल किया गया। हाईकोर्ट के दखल पर झूठे तथ्यों एवं साक्ष्यों के आधार पर मामले में एफआर लगाते हुए नामजद आरोपितो को क्लीनचिट दे दी गई। ढाई साल बाद ही परिवार के नजदीकी मोहम्मद तारिक की हत्या गोमती नगर में 1 दिसंबर 2017 को अंधाधुंध फायरिंग करके करा दी गई। इसमें भी हीला हवाली की जा रही है और नामजद आरोपियों को पुलिस बचाने का प्रयास कर रही है। एसटीएफ के आला अफसर मामले से जुड़े लोगों एवं शूटरों को संरक्षण दे रहे हैं। सीमा से सीएम योगी से पति की जान की गुहार लगाते हुए समूचे प्रकरण की निष्पक्ष जांच की मांग की है।

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