वाराणसी। सूबे को छोड़िये जनपद में राजस्व बकाये के कई बड़े मामले लंबे समय से लंबित हैं। इन्हें छोड़ प्रशासनिक अमला शराब और होटल कारोबारी जवाहर लाल जायसवाल के पीछे दो दिन से पड़ा था। सूत्रों की माने तो प्रदेश सरकार की नयी शराब नीति एक-दो दिन में घोषित होने वाली है। जवाहर लाल पुराने कारोबारी ही नहीं है बल्कि प्रदेश के दूसरे अधिकांश बड़े व्यापारियों के नजदीकी है। बताया जा रहा है कि पुराना सिंडिकेट एक बार फिर से उनकी अगुवाई में लामबंद हो रहा था। नयी नीति की घोषणा करने से पहले उन पर शिकंजा कर दूसरों को सकेत दे दिये गये हैं। यही नहीं निशाने पर कुछ स्थानीय भू माफिया भी हैं जिन पर योगी के संभावित दौरे से पहले कार्रवाई की जा सकती है। प्रशासनिक तेवर को भांप कर चर्चित सफेदपोशों में खलबली मची है।

आबकारी नीति में हो सकता बड़ा बदलाव

भाजपा के तत्कालीन आबकारी मंत्री सूर्यप्रताप शाही के कार्यकाल में दुकान स्तर पर लाइसेंस जारी करने का फैसला हुआ था। बाद की सरकारों ने इसे बरकरार रखा। लंबे समय से दुकानों के लिए नये आवेदन नहीं आये बल्कि पुराने लाइसेंसी का नवीनीकरण होता रहा। बताया जाता है कि इस बार बड़ा बदलाव होने वाला है। दुकानों का ग्रुप बनाकर आवेदन मांगे जायेंगे। इसे लेकर पुराने कारोबारी लामबंद हो रहे थे। माना जा रहा है कि सरकार ने अपना तेवर दिखा दिया है जिसके बाद अब विरोध के स्वर खुद ब खुद दबते जा रहे हैं।

अब निशाने पर रहेंगे भू माफिया

प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि सीएम योगी के दौरे से पहले चर्चित भू माफिया के खिलाफ भी कार्रवाई हो सकती है। पिछले दौरे पर सीएम ने इसे लेकर तंज कसा था। एक दिन पहले डीएम ने एंटी भू माफिया पोर्टर में डाटा इंट्री न करने को लेकर कानूनगो से लेकर लेखपालों का वेतन रोक दिया है। सभी को सीएम के आने तक की मोहलत मिली है। निशाने पर कुछ चर्चित भू माफिया भी हैं जिनके खिलाफ कार्रवाई का ‘चाबुक’ चल सकता है।

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