विनोद शाही

गोरखपुर। गोरक्षपीठ केउत्तराधिकारी और बीजेपी सांसद महंत योगी आदित्यनाथ की हियुवा के बगावती तेवर ढीले नही पड़ रहे हैं। योगी के कड़े तेवर को धता बता हियुवा अध्यक्ष सुनील सिंह ने बस्ती सदर से स्वर्गीय विष्णुदत्त ओझा की पत्नी सुधा ओझा और कुशीनगर जिला की रामकोला(सु) सीट से अशोक कुमार बादल को आज चुनाव मैदान मे उतार दिया।

 अनुशासनहीनता के आरोप में एक बर्खास्त

बस्ती मे कार्यकर्ताओं की एक बैठक के बाद सुनील सिंह ने एक और कड़ा तथा जवाबी फैसला लिया। सुनील सिंह ने कार्यालय प्रभारी पीके श्री मल्ल को उनके पद से यह कहते हुए बर्खास्त कर दिया कि उन्होने मल्ल को केवल कार्यालय के सामान्य कामकाज हेतु रखा था। बकौल सुनील सिंह हियुवा मे कार्यालय प्रभारी का कोई पद नहीं है और श्री मल्ल ने बिना किसी अधिकार के ही हियुवा के प्रदेश अध्यक्ष, महामंत्री और मंत्री को बर्खास्त करने संबंधी सूचना मीडिया को दी। उन्हें इसी अनुशासनहीनता के चलते वह बर्खास्त कर रहे हैं।

क्या है बगावत की असल वजह ?

भाजपा के टिकट वितरण की दूसरी सूची आने के बाद से ही हिन्दु युवा वाहिनी के प्रदेश अध्यक्ष सुनील सिंह और महामंत्री रामलक्ष्मण ने बागी तेवर अपना लिया है।हालांकि यह दोनों भाजपा द्वारा योगी को केन्द्र में मंत्री नहीं बनाने, सूबे के मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित नहीं करने तथा टिकट वितरण मे तवज्जो नहीं देने का मुद्दा बनाते हुए गुरू के अपमान के खिलाफ लड़ाई की बात कर रहे हैं। लेकिन हकीकत यह भी है कि यह दोनों ही चुनाव लड़ना चाहते थे मगर बीजेपी से टिकट न पा सके। जबकि योगी कोटे से डॉक्टर राधामोहन दास अग्रवाल, हियुवा के राघवेन्द्र प्रताप सिंह,राकेश बघेल,महेन्द्र पाल सिंह के साथ ही विपिन सिंह,शीतल पाण्डेय,सतीश द्विवेदी, फतेह बहादुर सिंह तथा विधायक राजेश त्रिपाठी आदि टिकट पा गये।

योगी के खास माने जाते हैं सुनील सिंह

हियुवा के प्रदेश अध्यक्ष सुनील सिंह और महामंत्री रामलक्ष्मण खुद को योगी की टीम के सबसे जुझारू और अगली पांत के सिपाही मानते हैं। इन दोनों पर हिन्दु अस्मिता के लिए संघर्ष के दौरान रासुका, गैगस्टर समेत कई दर्जन मुकदमे दर्ज हैं,जबकि योगी कोटे से टिकट पाने वाले उम्मीदवारों मे शायद ही कोई हो जिसपर एकाध मामले दर्ज हों।सुनील और राम लक्ष्मण का दर्द यही है, जिसे वह छिपा नही पा रहे हैं और अपने गुरू के सम्मान को ढाल बना बगावत का झंडा बुलंद किये हैं, गोकि योगी इन दोनो को हियुवा से बाहर कर चुके हैं लेकिन दोनो उसे भी चुनौती देकर अधिकार पर सवाल खड़े कर रहे हैं। हियुवा के बगावत की यह चिंगारी आने वाले दिनो मे क्या रंग दिखाती है यह सिर्फ कयास है मगर समय रहते इसे काबू नही किया गया तो सुनील सिंह जिसतरह धड़ाधड़ उम्मीदवार उतार रहे हैं उससे बीजेपी जरूर मुश्किल मे फंसने वाली है।

 

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