वाराणसी। बाहुबलियों पर नकेल कसने के लिए सरकार ने ई-टेंडरिंग की व्यवस्था की है लेकिन इसका कोई असर डीरेका में होते नहीं दिख रहा है। यहां पर उपकरणों से लेकर दूसरे सामान की सप्लाई हो या कोई काम करना हो, बगैर पंकज सिंह उर्फ डब्लू राय की इजाजत के कोई भी कर नहीं सकता था। करोड़ों के काम के एवज में डब्लू को मोटी रकम मिलती थी। लंबे समय से चल रहे इस ‘खेल’ में रोडा बनने का हौसला जुटाया था कर्मचारी नेता टीके मुकेश ने। मुकेश के प्रयासों का नतीजा था कि डब्लू के भाई रवि नारायण सिंह उर्फ बबलू राय को यूनियन से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया बल्कि नौकरी पर भी संकट के बादल मंडराने लगे थे। डब्लू के ‘कारनामों’ की जांच शुरू होने वाली थी जिसकी आंच में कइयों का झुलसना तय था। क्राइम ब्रांच की छापेमारी में पकड़े गये डब्लू ने ऐसे कई राज राज पुलिस के सामने कबूल किये हैं। शुक्रवार को एसएसपी आरके भारद्वाज ने मीडिया के सामने डब्लू को पेश करते हुए बताया कि 25 हजारा इनामी के पास से 9 एमएम पिस्टल भी मिली है।

केन्द्रीय मंत्री को ‘चाचा’ बताकर झाड़ता था धौंस

केन्द्र में भाजपा की सरकार बनने के बाद डब्लू राय ने एक केन्द्रीय मंत्री को अपना चाचा बताते हुए धौंस झाड़नी शुरू कर दी थी। इसमे सत्यतता कितनी थी वह ही जाने लेकिन केन्द्र के स्तर पर उसका कोई काम नहीं रुकता था। यही नहीं स्वजातीय केन्द्रीय मंत्री भले किन्हीं कारणों से दूरी बना कर चलते थे लेकिन विभाग में डब्लू का वर्चस्व समाप्त करने में उन्होंने भी कभी रुचि नहीं दिखायी। यही कारण था कि ‘आका’ भले पानी पीकर भाजपा को कोसते थे लेकिन इस पार्टी के शासनकाल में डब्लू का साम्राज्य भल-फूल रहा था।

मुकेश के बाद चुनौती देने वाला कोई नहीं

सूत्रों की माने तो डब्लू ने पुलिस के सामने कबूल किया कि फरारी में उसे जो फीडबैक मिला है उससे तय है कि मुकेश के बाद अब डीरेका में उसके वर्चस्व को कोई चुनौती देने कोई नहीं बचा है। जेल में कुछ सप्ताह या माह रहना होगा लेकिन करोड़ों रुपये ठेके के माध्यम से मिलते रहेंगे। गवाही कोई होनी नहीं है जिससे वह केस को कोई महत्व ही नहीं दे रहा था। अलबत्ता उसका कहना तो यहां तक था कि जेल से कई दूसरे ‘काम’ भी हो जायेंगे। बताया जाता है कि डब्लू समर्पण की फिराक में था लेकिन इससे पहले क्राइम ब्रांच प्रभारी विक्रम सिंह ने धर-दबोचा।

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