शुरू हुआ विश्व का सबसे बड़ा हैकाथॉन जिसमें है ढाई करोड़ इनाम, देश के 42 शहरों में 14 सौ टीमें ढूंढेगी लगातार 36 घंटे समाधान

वाराणसी। देश की महत्वाकांक्षी योजना स्मार्ट इंडिया हैकाथॉन के तहत स्मार्ट इंडिया हैकाथॉन 2019 प्रतियोगिता का शुभारंभ शनिवार को बीएचयू के सेंट्रल डिस्कवरी सेंटर से हुआ। यह कार्यक्रम देश के 42 शहरों, 48 नोडल सेन्टर, 1400 टीम, 11000 प्रतिभागी, 350 विभिन्न तरीके की समस्याओं पर आधारित 36 घण्टे लगातार चलता रहेगा। एआईसीटीइ कमेटी सदस्य प्रो.राजीव कुमार ने प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा कि आज जो भी छात्र यहां उपस्थित है वो सभी विजेता है क्यूंकि हमारे पास कुल 2 लाख से ज्यादा छात्रों की 37,000 से अधिक टीमों ने आवेदन दिया था। इसमें आप जैसे कुछ विशेष प्रतिभावान 1400 टीमों को ही फाइनल प्रतियोगिता के लिए चुना गया। वहीं नितिन भिड़े ने अपने उद्घोषण में छात्रों से कहा कि आप सब पर आज सरकार, संस्थान व प्राइवेट कंपनियों के लगभग 500 डिजिटल समस्याओं को हल करने का बड़ा दारोमदार है। आज आप जो भी करेंगे वो एक बड़ा बदलाव होगा।

तीन सालों से आयोजित हो रही है प्रतियोगिता

गौरतलब है कि स्मार्ट इंडिया हैकाथॉन का आयोजन पिछले 3 वर्षों से देश की प्रतिभाओं को बढ़ावा देने के लिए व डिजिटल समस्याओं के समाधान के लिए अपनी तकनीक विकसित करने के प्रयास के तहत किया जा रहा है। इसके तहत सरकार, संस्थान व प्राइवेट कंपनियों ने अपनी समस्याएं सामने रखी है जिसका डिजिटल समाधान टीमों को केवल 36 घंटे में खोज कर दिखाना है। इन समस्याओं का समाधान खोजने में जो टीम(एक टीम में 6 छात्र व 2 प्रोफेसर) सफल हो पाएगी उसे उनकी क्रियान्वयन क्षमता का मूल्यांकन कर एक लाख, 75,000 या 50,000 की नकद राशि से पुरस्कृत किया जाएगा। कुल ढाई करोड़ रुपये पुरस्कार के रूप में दिये जाने हैं।

बीएचयू की टीम ने इन पर रखा है ध्यान

बीएचयू में आई टीमें मुख्यत: सड़क दुर्घटनाओं को कैसे कैमरे की माध्यम से कैद किया जा सकता, ट्रैफिक समस्या से कैसे बचा जा सकता, सड़क दुर्घटना की कैसे सही जानकारी इकट्ठा की जा सकती है, कैसे किसी हादसे की स्थिति की सूचना तत्काल संबधित व्यक्ति तक पहुंचाई जा सकती, कैसे आपदा की स्थिति में प्रभावित लोगों तक तत्काल सुविधा पहुंचाई जा सकती,कैसे पर्यावरण की रक्षा की जा सकती जैसी कई समस्याओं पर कार्य कर रहे हैं। मारुति सुजुकी, गूंज फाउंडेशन विभिन्न कंपनियों, एनजीओ ने अपनी समस्याओं के समाधान छात्रों से मांगे हैं और वे इन प्रतिभागियों के लिए स्पॉन्सर कर न केवल सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना को बढ़ावा दे रही है बल्कि देश के प्रतिभा को एक बेहतरीन मौका भी दे रही है।

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