वाराणसी। एम्स दिल्ली में गुरुवार की शाम 5 बजकर 5 मिनट पर पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी ने अपनी अंतिम सांसे ली। एम्स से जैसे ही ये खबर सामने आयी की अटल युग का अंत हुआ वैसे ही देश में शोक की लहर दौड़ पड़ी। देश का हर वो व्यक्ति जो अटल बिहारी बाजपेयी के शख्शियत से रूबरू था उसकी आँखे नम हो गयी। अटल युग के अंत के बाद देश की राजधानी दिल्ली से लेकर सांस्कृतिक राजधानी व पीएम के संसदीय क्षेत्र काशी तक शोक देखने को मिला। काशी के दशाश्वमेघ घाट पर गंगोत्री सेवा समिति द्वारा आयोजित नित्य शाम होने वाली विश्व प्रसिद्ध गंगा आरती के जरिये पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी को श्रद्धांजलि अर्पित की।

दीपदान कर रखा गया मौन

गंगा आरती के शुरूआत से पहले गंगा की लहरों में 151 दीपदान कर उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किया और फिर गंगा आरती में शामिल हजारो देशी और विदेशी पर्यटकों ने दो मिनट मौन रखा और मां गंगा से उनके आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की। आरती में शामिल सभी लोगो की आंखे नम रही और लवों पर सिर्फ ये शब्द रहा की ईश्वर उनकी आत्मा को शांति दे। गंगोत्री सेवा समिति के संस्थापक अध्यक्ष किशोरी रमण दुबे (बाबू महराज) ने बताया की गंगा आरती पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी के नाम समर्पित रही और मां गंगा से उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की गयी। श्रद्धांजलि सभा में दिनेश शंकर दुबे , रामबोध सिंह, हेमंत दत्ता सहित भरी संख्या में श्रद्धालु शामिल रहे।

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