‘मिश्रजी’ हुए भाजपाई, घोषणापत्र जारी होने के साथ राष्ट्रवाद को लेकर की थी कांग्रेस की ‘खिंचाई’

वाराणसी। यूपीए चेयरपरसन की पुत्री और कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की बहन प्रियंका वाड्रा भले ही मोदी के खिलाफ काशी में चुनाव लड़ने का ठम ठोंक रही हैं लेकिन जमीनी हकीकत उन्हें भी पता है। कांग्रेस जमीनी स्तर पर संगठन को खो चुकी ही है और इससे जुड़े नेता दूसरे दलों की तरफ रूख कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर अब तक सभी को जवाब देने वाले पुराने कांग्रेसी अरविन्द मिश्र ने रविवार को नई राजनीतिक पारी की शुरूआत करते हुए भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ग्रहण कर ली है। उन्होंने इसके साथ ‘राष्ट्रवाद’ की ओर एक बड़ा कदम बढ़ाया है। सूबे की राजधानी लखनऊ भाजपा प्रदेश कार्यालय में प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र नाथ पांडे ने उन्हें पार्टी की सदस्यता दिलाई। गई

नीतियों को लेकर की थी मुखालफत

अरविन्द मिश्र पिछले दो दशकों से कांग्रेस से जुड़े ही नहीं रहे बल्कि जिम्मेदार पदों पर दायित्व को बखूबी निभाया। बावजूद इसके पिछले दिनों कांग्रेस का मेनिफेस्टो जारी हुआ तो इस पर सवाल उठाने वालों में वह पहली कतार में थे। उनका मानना था कि हाल के दिनों में पाकिस्तान में एयर स्ट्राइक और सेना पर कांग्रेस नेताओं के सवाल उठाने तक तो बर्दाश्त किया गया लेकिन इसके बाद नहीं। लोकसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस ने अपने मेनिफेस्टो में देशद्रोह और अफस्पा कानून को हटाने की बात कही तो अरविंद मिश्रा ने न सिर्फ पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया बल्कि खुल कर विरोध जताया।

मान-मनौव्वल के हुए थे प्रयास

अरविन्द मिश्र की अहमियत पार्टी के लोगों को पता थी। यही कारण था कि इस्तीफे के बाद मान-मनौव्वल के प्रयास जोरों से चले। सोशल मीडिया से लेकर हर प्लेटफार्म का इस्तेमाल किया गया लेकिन राष्टवाद को लेकर वह समझौता करने को राजी नहीं हुए। पीएम मोदी को काशी में घेरने का दावा कर रही कांग्रेस की जमीनी हकीकत बताते हुे अरविन्द मिश्र का दावा है कि बूथ पर एजेंट तक तो मिलने नहीं हैं और बाते हवा-हवाई हैं। प्रियंका नहीं कोई दूसरा भी लड़ कर देख ले, जमानत नहीं बचने वाली है।

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