लेखपालों की मिलीभगत से कई अरबों की बंजर जमीन 15 खाताधारकों के नाम कर दी गयी भूमिधरी

मऊ। सरकारी भूमि को राजस्वकर्मियों की मिलीभगत से किस तरह प्रभावशाली लोगों के नाम किया जाता है इसका जीता जागता नमूना सामने आने के बाद प्रशासनिक अधिकारियों के होश फाख्ता हैं। दरअसल शहर कोतवाली क्षेत्र के बुनाई विद्यालय और औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान के बीच में स्थित है अरबों की कीमत वाली जमीन के संग कुछ ऐसा ही किया गया है। शहर कोतवाली थाना क्षेत्र के गाजीपुर तिराहा के पास बेची गई सारी जमीनें के रिकार्ड की पड़ताल के बाद ज्वाइंट मजिस्ट्रेट अतुल वत्स ने डीएम को सौंपी पूरी रिपोर्ट तो दशकों से चल रही इस हेराफेरी का पर्दाफाश हुआ।

इस तरह की गयी हेराफेरी

गौरतलब है कि आईटीआई संस्थान के जमीन की पैमाइश के दौरान हुआ यह चौंकाने वाला बड़ा खुलासा हुआ है। जांच में स्पष्ट हुआ कि 1957 से बुनाई विद्यालय के नाम से राजस्व अभिलेखों में दर्ज है जमीन। इसके बाद वर्ष 1982 के बाद जमीन में हेराफेरी का खेल आरम्भ हुआ। खास यह कि जमीन को पहले मुआबजा के नाम पर हस्तांतरित किया गया जिसके कुछ सालों बाद बैनामा किया गया।

आरोपित लेखपालों के संग खाताधारकों के खिलाफ होगी रपट

ज्वाइंट मजिस्ट्रेट की रिपोर्ट के आधार पर जल्द ही पेरिस प्लाजा सहित 15 खाताधारकों के खिलाफ अतिक्रमण से मुक्त कराने का अभियान शुरू होगा। आरम्भिक जांच में ही कई राजस्वकर्मी की संलिप्तता सामने आ चुकी है। लेखपाल खेदारुराम यादव व रिटायर्ड लेखपाल मोहम्मद शमीम की मिलीभगत से अरबों की जमीन बेचा गया है। अब इन दोनों लेखपालों व 15 खातेदारों के एंटी भू माफिया का मुकदमा दर्ज कर विधिक कारवाई की जायेगी।

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