वाराणसी। उत्तर प्रदेश और बिहार की संंयुक्त टीम ने जांच में पाया कि जिस सीमेंट इकाई को अप्रैल से अक्टूबर-2018 के मध्य 110 करोड़ का लोहा भेजा जाना कागजों में घोषित किया गया है उसे दूसरी कंपनी अप्रैल में ही टेकओवर कर चुकी है। नयी कंपनी अपने नये ब्रांड नेम से इस फैक्ट्री में सीमेंट का उत्पादन भी कर रही है। इस फैक्ट्री में काम करने वाले पुराने कर्मचारियों और नयी कंपनी के अधिकारियों ने जांच के दौरान बताया कि अप्रैल से अब तक इस कंपनी में न तो कोई लोहा आया और ना ही इस कंपनी से लोहे का कारोबार हुआ। जांच में पाया गया कि करापवंचन तत्वों ने 110 करोड़ रुपये की फर्जी इनवायसिंग और 20 करोड़ रुपये की फर्जी आईटीसी का गलत फायदा उठाया है। इस पर आगे कार्रवाई की जा रही है।
इस तरह पकड़ा गया था फर्जीवाड़े का खेल
रिसर्च सेल ने अक्टूबर में की गयी कार्यवाही के फॉलोअप विश्लेषण पर यह पाया था कि मीरजापुर जिले में स्थित एक स्टील निर्माता कंपनी ईको स्टील ने भभुआ (बिहार) में स्थित अपनी एक अन्य सिस्टर कंपनी ईको सीमेंट, जो सीमेंट का निर्माण करती है, को अप्रैल-18 से अक्टूबर-18 तक 110 करोड़ रुपये मूल्य का लोहा सरिया के बिल और ई-वे बिल जारी किया है। यह भी पाया गया कि बिहार स्थित सीमेंट निमार्ता इकाई की तरफ से आगे लोहे की कोई बिक्री घोषित नहीं की जा रही है। उल्लेखनीय है कि करीब एक अरब 10 करोड़ रुपये मूल्य के लोहे की नियमित खरीद के बावजूद आगे इसकी कोई बिक्री घोषित न होना, अपने आप में संदेहास्पद साबित हुआ। इसी के आधार पर यूपी व बिहार की टीम ने संयुक्त छापेमारी कर बड़े पैमाने पर हो रही कर चोरी का खुलासा किया।

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