जब खुद पर बन आयी तो लंका पुलिस बीएचयू की चीफ प्राक्टर समेत 29 को ‘मुल्जिम’ बनायी

वाराणसी। सीआरपीसी की धारा 156(3) के तहत दाखिल याचिका पर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट जेपी यादव की अदालत मुकदमा दर्ज कर विवेचना का आदेश कर चुकी थी। बार-बार आख्या मांगे जाने के बावजूद लंका थाना प्रभारी प्रकरण में ढुलमुल रवैया अपनाये थे। वजह, मुकदमा बीएचयू की चीफ प्राक्टर प्रोफेसर रोएना सिंह समेत लगभग ढाई दर्जन लोगों के खिलाफ लिखा जाना था। आख्या न भेजने पर कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए लंका थाना प्रभारी को 4 मई को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में उपस्थित होकर कारण स्पष्ट करने का निर्देश दिया है कि क्यों न उनके खिलाफ न्यायालय के आदेश की अवहेलना करने पर दंडात्मक कार्यवाही की जाय। कोर्ट के तेवर भांपते हुए आनन-फानन में प्राक्टर सहित 29 लोगों के खिलाफ लंका थाने में हत्या का प्रयास, लूट, बलवा, आपराधिक साजिश सहित 12 आरोपों में मुकदमा दर्ज किया गया है।
कई अधिकारी बने है आरोपित
गौरतलब है कि आशीष कुमार सिंह ने अदालत याचिका दाखिल की थी। आरोप था कि बीएचयू चीफ प्रॉक्टर ने 7 और 20 मार्च को सुरक्षा कर्मियों के साथ मिलकर उसकी दुकान तोड़ दिया और उसे व उसके परिवार वालों को मारापीटा था। इस मामले में चीफ प्रॉक्टर के संग संपदा विभाग के लालबाबू पटेल, मुख्य आरक्षाधिकारी संसार सिंह, सुरक्षाकर्मी विनोद सिंह व सुनील सिंह और 24 अज्ञात सुरक्षाकर्मी आरोपित बनाये गये थे। आरोप था कि इस दौरान आशीष और उनके परिजनों की पिटाई कर गालीगलौज की गई। इसके साथ ही उनकी लकड़ी की दुकान में आग लगा दी गई और फायरिंग कर हत्या का प्रयास किया गया। थाने और आला अधिकारियों को सूचना देने पर भी कार्रवाई न होने पर कोर्ट का सहारा लेना पड़ा।

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