वाराणसी। गुजरात विधानसभा चुनाव में जिस तरह की घेराबंदी की गयी थी उसके बावजूद भाजपा की सरकार बनना विपक्ष भूल नहीं सका है। सम्भवत: यही कारण है कि नये से रणनीति तैयार कर अलग-अलग मोर्चे पर सेनापति उतारे जा रहे हैं। इसकी बानगी गुरुवार को गुजरात के दलित नेता जिग्नेश मेवानी के बयानों में देखने को मिली। मीडिया से बातचीत के दौरान जिग्नेश ने पीएम मोदी पर तंज कसते हुए कहा कि मां गंगा ने यहां पर बुलाया था। यहां क्या पूरे देश में कुछ किया नहीं। अब साबरमती वापस बुला रही है और लोकसभा चुनाव में सूपड़ा साफ होने के बाद ‘साहब’ वहीं पर विश्राम करेंगे। खास यह कि गुजरात चुनाव में सीएम योगी की भूमिका को जिग्नेश नहीं भूल सके हैं। उनके निशाने पर पीएम से अधिक सीएम रहे जिन पर एनकाउंटर के नाम पर सैकड़ों की हत्या कराने से लेकर कानून-व्यवस्था ध्वस्त करने समेत संगीन आरोप लगाये।

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भूल जाये दलित वोट, जो मिलता भी वह भी जायेगा

मोदी सरकार ने भले एससीएसटी एक्ट को लेकर सुप्रीम कोर्ट के आदेश को पलटते हुए लोकसभा और राज्यसभा ने नया कानून पारित कराया लेकिन यह जिग्नेश को नाकाफी लगता है। उनका कहना था कि भाजपा को इससे दलित वोट नहीं मिलने वाला है। दलित संगठनों के 2 अप्रैल को विरोध-प्रदर्शन के दौरान जिन 11 लोगों की जान गयी थी वह इससे वापस नहीं आयेगी। तंज कसते हुए कहा कि इससे तो जो वोट मिलता था वह भी जायेगा। यह तो तमाचा जड़ने के बाद मलहम लगाने जैसा है लेकिन दलित इस झांसे में आने वाला नहीं है। दलित राजनीति की नयी परिभाषा गढ़ते हुए जिग्नेश ने कहा कि बहन मायावती बीच में हों और एक सरफ भीम सेना के चंद्रशेखर तो दूसरी तरफ जिग्नेश खड़ा होगा तो उन्हें पीएम बनने से कौन रोक सकता है?

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बेरोजगार निराश, किसान हताश

जिग्नेश के एजेंडे में सिर्फ दलित ही नहीं थे बल्कि बेरोजगारी को लेकर भी उन्होंने पीएम मोदी को खरी-खरी सुनायी। उनका कहना था कि मोदीजी ने वादा किया था कि हर साल दो करोड़ लोगों को रोजगाल मिलेगा लेकिन साढ़े चार बीतने को हैं इसके एक प्रतिशत को भी नहीं मिला। इनकी नीयत सही रहती तो 25 लाख रिक्तियों को भरा होता। कर्ज के बोझ से बदे किसान आत्महत्या कर रहे हैं लेकिन मोदीजी अपने करीबी उद्योगपतियों का कर्ज माफ करने में जुटे हैं। साफ है कि उन्हें किसानों की चिन्ता ही नहीं है।

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