भदोही। अब तक प्रदेश की संस्कृति रही कि सीएम के आगमन पर मंच पर उन्हें कुछ भेंट कर विधायक अपना ‘भाव’ बढ़ाते थे। बसपा सुप्रीमो मायावती से लेकर पूर्व सीएम अखिलेश यादव मंच पर चांदी की गदा-हाथी से लेकर मुकुट तक स्वीकार करते थे। विधानसभा चुनाव के समय दूसरे दलों से आये नेता अब भी भाजपा की संस्कृति नहीं समझ सके हैं। यही कारण है कि बसपा से भाजपा में आये भदोही के विधायक रवीन्द्रनाथ त्रिपाठी ने मंच पर सीएम का संबोधन समाप्त होने के बाद उन्हें सोने की मोटी चेन पहनाने का प्रयास किया। सीएम ने उन्हें रोका ही नहीं बल्कि सपाट लहजे में पूछा कि संन्यासी को इन संसारिक वस्तु से क्या काम? हजारों की भीड़ के सामने शर्म से पानी-पानी विधायक ने कुछ सफाई पेश करने की कोशिश की लेकिन सीएम ने एक तरफ हटा दिया। अलबत्ता ज्ञानपुर के विधायक विजय मिश्र ने अंगवस्त्रम के रूप में एक शाल भेंट किया जिसे सीएम ने स्वीकार किया। विजय मिश्र भले निषाध पार्टी के टिकट पर चुने गये थे लेकिन हर मौके पर उन्होंने भाजपा का साथ दिया।

उगाही की शिकायते पहुंची थी सीएम तक!

सूत्रों की माने तो कार्यक्रम में आगमन से पहले भाजपा से जुड़े जनप्रतिनिधियों से लेकर संगठन से जुड़े लोगों की उगाही की शिकायते सीएम तक पहुंची थी। यहीं नहीं पूर्व संध्या पर इसे लेकर सांसद की तरफ से नाराजगी जाहिर की गयी थी। कालीन नगरी में सैकड़ों की संख्या में कारपेट तक ले लिये गये थे। इन शिकायतों को लेकर सीएम खिन्न थे। सम्भवत: यही कारण था कि कानून-व्यवस्था और विकास कार्यक्रमों की समीक्षा के बाद एक और विधायक ने सीएम को अधिकारियों के सामने रोक कर कुछ कहने की कोशिश की तो उन्होंने एक तरफ कर दिया।

प्रदेश अध्यक्ष नहीं छिपा सके खुन्नस

भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष डा. महेन्द्रनाथ पाण्डेय मूल रूप से गाजीपुर के रहने वाले हैं और यहीं से वह पहली बार विधायक बने थे। इसके बाद पराजय और सीट सुरक्षित होने पर उन्होंने भदोही से किस्मत आजमाने की कई बार कोशिश की लेकिन सफलता नहीं मिली। मोदी लहर में वह चंदौली से सांसद हो गये लेकिन भदोही को लेकर दर्द वह छिपा नहीं पाते। सीएम सभा स्थल पर उन्होंने जो टिप्पणी ‘यहां के लोग बिना धकियाएं नहीं सुनते’ का भदोही के निवासी कई मायने लोग निकाल रहे हैं। दरअसल सीएम के कार्यक्रम स्थल पर मंच के सामने मीडिया के लोग जहां फोटोग्राफी में लगे थे, वहीं पीछे से कार्यकर्ता नारेबाजी कर रहे थे। इस पर अपने संबोधन के दौरान प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि यहां की एक आदत है कि बिना धकियाएं लोग नहीं सुनते। विरोध का स्वर उठते देख उन्होंने बात संभालने की कोशिश करते हुए कहा कि आप सभी थोड़ा सामंजस्य बना लें, मीडिया के लोग आप लोगों का ही काम कर रहे हैं।

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