वाराणसी। रामनगर शमशान घाट पर बुधवार की शाम जुटे लोगों के दुख का ठिकाना न था। क्यों न हो, चिता पर जिस न विकास (21) का शव चिता पर अंतिम संस्कार के लिए स्नान के बाद लिटाया गया वह एक सड़क हादसे का शिकार हुआ था। मंडुवाडीह स्थित पापुलर अस्पताल में पिछले तीन दिनों में इलाज के नाम पर लाखों रुपये परिवार ने खर्च कर दिये थे। वहां के डाक्टरों ने मृत घोषित किया तो परिवार की उम्मीदें खत्म हो गयी। परिजनों ने विकास के शव को गंगा स्नान कराकर जैसे ही चिता पर रखा तभी विकास की सांसें चलने लगी साथ ही हाथ-पैर हिलने लगे। पहले तो भूत-भूत चिल्लाते लोग भागे लेकिन खुली आंख और सांस चलते देख परिजन आश्चर्यचकित हो गए। आनन फानन में घाट पर मौजूद लोग विकास को बीएचयू स्थित ट्रामा सेंटर लेकर पहुंचे। डाक्टरों ने विकास का इलाज शुरू किया लेकिन दोबारा इलाज शुरू होने के 15 मिनट बाद विकास की मृत्यु हो गयी । ट्रामा सेंटर के डॉक्टरों का कहना था कि अगर इलाज शुरू होने के कुछ घण्टे पहले विकास को लाया जाता तो विकास बच सकता था। बाद में पुन: परिजन विकास के शव को लेकर रामनगर स्थित शमशान घाट आये और शवदाह की प्रक्रिया पूरी की।

अस्पताल पर करेंगे मुकदमा

घाट पर मौजूद विकास के पिता धर्मेन्द्र कन्नौजिया का कहना था कि मडुआडीह स्थित पापुलर अस्पताल के डाक्टरों ने लाखो रुपये ऐंठने के बाद मेरे जिन्दा बेटे को मृत करार दिया। बेटे के गलत मरने की जानकारी देने के बाद भी 33 हजार रुपया ले लिया गया। बेटे को मृत समझ रिश्तेदारों के इंतजार में हमने 4 घंटे समय गंवा दिए नही तो मेरा बेटा आज जिंदा होता। पापुलर अस्पताल द्वारा हमें न तो कोई मृत्यु प्रमाण पत्र दिया गया और न ही कोई अन्य कागजात दिए गए । घटना से गुस्साए लोगों के साथ ही पूर्व सभासद गणेश सोनकर ने कहा कि मडुवाडीह स्थित निजी चिकित्सालय के खिलाफ विकास को जान से मारने का मुकदमा कराया जाएगा । विकास शादी-विवाह में पानी आपूर्ति का काम करता था। दुर्घटना के वक्त घायल दूसरे लड़के दाऊ सोनकर की स्थिति खतरे से बाहर है। विकास के पिता धर्मेन्द्र साड़ी कड़ाई का काम करते है। विकास तीन भाई व दो बहनों में सबसे बड़ा था। चिता पर मुर्दे के जिन्दा होने की घटना की चर्चा पूरे रामनगर के हर चौराहों पर रही।

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