लखनऊ। दिल्ली के बहुचर्चित बटला हाउस कांड समेत देश के कई हिस्सों में हुई आतंकी गतिविधियों में संलिप्तता के चलते आजमगढ़ पिछले डेढ़ दशक से चर्चा में रहा है। यहां के कई युवक ऐसे हैं जिन पर देश की सर्वोच्च जांच एजेंसी एनआईए की तरफ से पुरस्कार घोषित है। कुछ समय से आजमगढ़ को लेकर कोई ऐसी खबर नहीं रही लेकिन सोमवार को एटीएस के खुलासे से एक बार फिर सनसनी फैल गयी है। जम्मू-कश्मीर के बांदीपुरा सेक्टर से जो चार आतंकी पकड़े गये थे उनसे जमनियां (गाजीपुर) के कसेरा-पोखरा निवासी शेख अली अकबर जुड़ा था। दिखावे के तौर पर सेल्समैन का काम करने वाले शेख अली अकबर से पूछताछ में एटीएस को चौंकाने वाली जानकारियां मिली हैं।

असलहा सप्लाई करने की खातिर लिया था धन

अब तक यही सुनने को मिलता रहा कि पाकिस्तान से सीमा पार कर आने वाले आतंकी अत्याधुनिक असलहों से लैस रहते हैं लेकिन इस बार उन्होंने रणनीति बदली थी। सीमा खाली हाथ पार की थी और असलहे की सप्लाई का जिम्मा शेख अली अकबर ने लिया था। इसके लिए उसे 40 हजार का भुगतान किया गया था जो बैंक से प्रमाणित हो चुका है। इसके अलावा हवाला के जरिये भी रकम दिये जाने की संभावना जतायी गयी है।

ट्रेनिंग के लिए पाकिस्तान से आया था बुलावा

शेख अली अकबर सोशल मीडिया के जरिये आतंकियों से जुड़ा था लेकिन बाद में व्हाट्सएप काल कर बात करने लगा था। उसे पकिस्तान में बैठे आतंकियों के आका ने ट्रेििनंग के लिए बुलाया था लेकिन किन्ही कारणों से जाना नहीं हो सका था। कश्मीर से गिरफ्तार आतंकियों से पूछताछ में शेख अली अकबर से सांठ-गांठ की पुष्टि हो चुकी है। यही नहीं उसके मोबाइल से बातचीत के प्रमाण के अलावा जेहादी वीडियो भी मिले हैं जिसकी जांच की जा रही है। साथ ही प्रदेश के दूसरे इलाकों में आतंकियों से जुड़े लोगों के बाबत प्रमाण मिले हैं जिसकी गोपनीय ढंग से जांच की जा रही है।

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