भले इतिहास रचते हुए जीत गये अतुल राय लेकिन चुनाव पर लटक रही है तलवार!

मऊ। प्रदेश में ऐसा पहले कहां हुआ यह तो जानकारों को भी नहीं अंदाज है लेकिन पूरे लोकसभा चुनावों के दौरान दुष्कर्म सरीखे संगीन आरोपों में फरार रहने वाले गठबंंधन के बसपा प्रत्याशी अतुल राय ने जीत हासिल की है। भाजपा के प्रत्याशी हरिनारायण राजभर को पराजित कर भले उन्होंने जीत हासिल कर ली हो लेकिन विधिक विशेषज्ञों की माने तो राह आसान नहीं है। नामांकन की खातिर गलत जानकारी का मामला गले की फांस बन सकता है। साथ ही दुष्कर्म के मामले में अत्मसमर्पण कर जेल जाना होगा और जमानत के लिए एक फिर से कोर्ट के दरवाजे खटखटाने होंगे।

अंसारी परिवार के रहे हैं खास

अतुल राय को बाहुबली विधायक मुख्तार अंसारी के करीबियों में गिना जाता है। यह बात दीगर है कि मुख्तार दो बार पूरा जोर लगाने पर भी सांसद नहीं बन सके जबकि अतुल राय ने बिना विधायक बने यह उपलब्धि हाजिल कर ली। मुख्तार ने अपने बड़े पुत्र अब्बास के लिए इस सीट पर भरसक प्रयास किया था लेकिन टिकट तक नहीं दिला सके। अतुल को लेकर जिस आदेश का हवाला दिया जा रहा है वह मध्य प्रदेश और सुप्रीम कोर्ट का है। सोशल मीडिया पर खासा शेयर हो रहा है।

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