विश्वनाथ कॉॅरिडोर तो बहाना असल में पीएम पर है निशाना! सवालों के घेरे में एक दिन के मलवे में डेढ़ सौ विग्रह का आना

वाराणसी। आगामी लोकसभा चुनाव से पहले पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों के नतीजे आ चुके हैं। ‘नरम हिन्दुत्व’ और राहुल गांधी का ‘जनेऊधारी’ अवतार के संग मूल के बदले पिता की ननिहाल का गोत्र भी हिट साबित हो चुका है। खुफिया सूत्रों की माने तो अब पीएम मोदी को उनके संसदीय क्षेत्र काशी में घेरने की तैयारी चल रही है। इसके लिए काफी दिनों से श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर कॉरिडोर को लेकर आंदोलन खड़ा करने की कोशिश की गयी लेकिन क्षेत्रीय स्तर पर सहयोग न मिलने पर न सिरे से तैयारी की गयी। सब कुछ इस तेजी के साथ हुआ कि पुलिस-प्रशासन को कुछ इसी तरह से चलना पड़ा जिसका खाका तैयार किया गया था।

संयोग या साजिश का हिस्सा!

जहां पर मलवा गिराया गया है वहां आसपास रहने वालों का कहना है कि पिछले 24 घंटे में ही यह गिरा है। तय है कि विश्वनाथ मंदिर कॉरिडोर के सभी भवन ध्वस्त इस अवधि में नहीं हुए हैं और न ही एक-एक में दर्जनों मंदिर हों। इसके अलावा आसपास के लोगों को पता भी नहीं था लेकिन वहां खासी भीड़ पहुंच गयी तो पता चला कि दर्जनों शिवलिंंग के संग डेढ़ सौ विग्रह यहां फेंके हैं। इससे पहले भी अयोध्या में विहिप के आयोजन के समय भी काशी में समानांतर का कार्यक्रम आयोजित था। यह बात दीगर है कि भीड़ नहीं जुट पायी अलबत्ता दावे तमाम रहे।

पीएम के विरोध के लिए नया मुद्दा

वैसे भी लोकसभा की एक चौथाई सीट देने वाले उत्तर प्रदेश और बिहार में कांग्रेस को भाव नहीं मिल रहा है। वह चंद सीटों की खातिर गठबंधन का हिस्सा बनने की मुनहार कर रही है लेकिन उस पर भी कोई तवज्जो नहीं मिल रही है। तीन राज्यों की सत्ता पर काबिज होने के बावजूद वह इन दिनों पीएम का विरोध करने के लिए नया मुद्दा ढूंढती फिर रही है। संयोग है कि 10 दिनों के बाद पीएम को आना है और सैकड़ों के भाव से शिवलिंग और विग्रह मलवे में मिल रहे हैं।

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