वाराणसी। विधानसभा चुनाव के पहले पूर्वांचल में सियासी समीकरण तेजी से बदलने लगे हैं। समाजवादी पार्टी में अखिलेश यादव के हाशिए पर रहे नेताओं की बगावत ने पार्टी को पसोपेश में डाल दिया है। कमोबेश बीजेपी भी टिकट बंटवारे को लेकर टेंशन में है। इन सबके बीच सभी पार्टियों की सबसे बड़ी परेशानी पांच दलों का नया पॉलिटिक फ्रंट है। फ्रंट की धुरी बने ज्ञानपुर से विधायक और पूर्व सपा नेता विजय मिश्रा ने सपा के सर्वनाश के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। भदोही के साथ आसपास के जिलों में भी मजबूत जनाधार रखने वाले विजय मिश्रा के इस नए कदम से खासतौर से समाजवादी पार्टी के नेताओं की नींद उड़ गई है। माना जा रह है कि कई सीटों पर उम्मीदवार बदले जा सकते हैं। बुधवार को लखनऊ में पार्टी दफ्तर में एक अहम बैठक भी हुई।

नई रणनीति बनाने में जुटे सपाई

विजय मिश्रा का भदोही और मिर्जापुर में क्या रसूख है ये हर कोई जनता है। भदोही के ज्ञानपुर से वो खुद विधायक रहे हैं। इसके अलावा मिर्जापुर और सोनभद्र से उनकी पत्नी रामलली मिश्रा विधान परिषद सदस्य  हैं। दोनों ही जिलों में समाजवादी पार्टी के अंदर विजय मिश्रा की हनक थी। लेकिन सपा में जब से अखिलेश राज आया विजय मिश्रा निशाने पर आ गए। विजय मिश्रा ने पार्टी छोड़ी तो सपा के सर्वनाश का ऐलान कर दिया। इसके बाद से ही सपाई सकते में है। विजय मिश्रा को शिकस्त देने में रणनीतिकार लगे हुए हैं। पार्टी विजय मिश्रा के प्रभाव वाली सीटों पर नए सिरे से रणनीति बना रही है। जातिगत समीकरण के साथ ही अब उन सीटों पर मजबूत उम्मीदवार उतारने की तैयारी है, जहां पहले से उम्मीदवार घोषित है। पिछले दो दिनों से सपा आलाकमान के बीच इस बात को लेकर मंथन चल रहा है।

इन सीटों पर है विजय मिश्रा का सीधा प्रभाव

विजय मिश्रा खुद ज्ञानपुर सीट से ताल ठोक रहे हैं। इसके अलावा गठबंधन के तहत उन्होंने भदोही, इलाहाबाद, और मिर्जापुर की एक दर्जन सीटों पर अपने समर्थक उम्मीदवारों को उतारने के संकेत दिए हैं। इन सीटों पर विजय मिश्रा समर्थकों की भारी तादाद है। पार्टी के अलावा व्यक्तिगत रुप से विजय मिश्रा का यहां मजबूत जनाधार रहा है। एक नेता से अधिक व्यक्ति के तौर पर लोग उन्हें यहां पसंद करते आए हैं। यही कारण है कि विजय मिश्रा ने इऩ सीटों पर अपने समर्थक उम्मीदवारों को मैदान में उतारने का निर्देश दिया है। माना जा रहा है कि इन उम्मीदवारों के मैदान में आने से सपा का खेल बिगड़ सकता है।

ब्राह्मणों में है अच्छी पकड़

पूर्वांचल में समाजवादी पार्टी के अंदर विजय मिश्रा की पहचान बड़े ब्रह्मण चेहरे के तौर पर होती थी। ब्राह्मण वोटबैंक में उनकी अच्छी पकड़ है। यही कारण था कि तमाम विवाद जुड़े होने के बाद भी मुलायम सिंह ने उन्हें हमेशा सिर आंखों पर बैठाए रखा। ब्राह्मणों की राजनीति करने के साथ ही अपने क्षेत्र में वो जमीनी स्तर के नेता भी माने जाते हैं।  लेकिन सपा में सत्ता का समीकरण बदलते ही वो दूसरे नेताओं की तरह वो भी अखिलेश के निशाने पर आ गए।

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