वाराणसी। सूबे में सत्ता परिवर्तन के साथ अपराध जगत में भी सरगर्मी तेज हो गयी है। चुनाव प्रचार के दौरान जिस तरह खुद प्रधानमंत्री ने जेल में निरुद्ध अपराधियों को लेकर सपा-बसपा पर निशाना साधा था उससे स्पष्ट संकेत था कि सरकार बनने पर शिकंजा कसा जायेगा। मुख्तार इस बार बसपा टिकट पर मऊ सदर से चुनाव जीते हैं लेकिन उनके पुत्र अब्बास और भाई सिवगतुल्लाह को पराजय का सामना करना पड़ा। परिणाम आने के साथ मुख्तार और उसके करीबी प्रेम प्रकाश उर्फ मुन्ना बजरंगी को प्रदेश से बाहर शिफ्ट किये जाने की चर्चा शुरू हो गयी है। यहीं नहीं पूर्वांचल की दूसरी जेलों में सरगर्मी बढ़ गयी है। जेल में रह कर संगीन वारदात की योजना तैयार करने और गुर्गों से अंजाम दिलाने वालों को भी हटाने की तैयारी चल रही है।

कृष्णानंद राय हत्याकांड बना है गले की फांस

मुख्तार अंसारी और मुन्ना बजरंगी दोनों ही पूर्व भाजपा विधायक कृष्णानंद राय समेत सात लोगों की हत्या के मामले के आरोपित हैं। मामला इन दिनों दिल्ली की सीबीआई कोर्ट में चल रहा है। कृष्णानंद की पत्नी अलका राय इस बार मोहम्मदाबाद सीट से विधायक चुनी गयी है। अलका राय लंबे समय से कानूनी लड़ाई लड़ रही हैं लेकिन सूबे की सरकार से किसी तरह का सहयोग न मिलने के कारण वह खासी निराश थी। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी जिसके बाद मामले को दिल्ली शिफ्ट करने का आदेश दिया गया था। सूत्रों के मुताबिक कृष्णानंद हत्याकांड का वास्ता देकर दोनों को प्रदेश के बाहर शिफ्ट किये जाने की आशंका जतायी जा रही है।

जेल के मैसेज बता रहे हैं बेचैनी की दशा

पुलिस समेत दूसरी खुफिया इकाइयों को इन दिनों जो सूचना मिल रही है उसके मुताबिक कुछ गिरोह से जुड़े अपराधी अपने करीबियों को संदेश भेज रहे हैं कि जल्द ही दूसरी जेल तबादला किया जा सकता है। लंबे समय से जेल मेें रहने वाले ही नहीं बल्कि किसी तरह जमानत करा कर छूटने वालों में भी बेचैनी है। पहले का आपराधिक इतिहास ध्यान में रखते हुए पुलिस कार्रवाई कर सकती है। कुछ ने तो हालात सामान्य होने तक प्रदेश से बाहर जाने का निर्णय ले लिया है। कई अपने लिए नये आका की तलाश कर रहे हैं जहां से संरक्षण मिल सके। इनमें भाजपा नेता से लेकर संगठन तक के लोग शामिल हैं।

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