वाराणसी। सुकमा में नक्सली हमले और 26 सुरक्षाकर्मियों की हत्या के बाद एजेंसिया सक्रिय हो गयी है। सीमा पर कर नक्सलियों के आने की आशंका को ध्यान में रखते हुए अंतर प्रांतीय बैठक बुलायी गयी। चंदौली में दूसरे प्रदेश के पुलिस अधिकारी और केन्द्रीय फोर्स के संग बैठक में प्रदेश का प्रतिनिधित्व करने वाले डीआईजी विजय भूषण ने समन्वय पर खासा जोर दिया। डीआईजी का कहना था कि सीमा पर गश्त के साथ आपरेशन में विशेष सावधानी बरतनी चाहिये। सुरक्षा को लेकर जो पहले से दिशा निर्देश जारी हैं उनका पूरी तरह से पालन करे। इसके काफी समस्या खुद ब खुद दूर हो जायेगी।

तेंदू पत्ता तुड़ाई सीजन में सक्रिय होते हैं नक्सली

उत्तर प्रदेश में लंबे समय से कोई नक्सली वारदात नहीं हुई है लेकिन तेंदू पत्ता तुड़ाई के सीजन में इनके मूवमेंट की खबरे मिलती है। वजह, तेंदू पत्ते की तुड़ाई के समय नक्सली लेवी के रूप में रंगदारी वसूली करते हैं। इस समय तेंदू पत्ते की तोड़ाई शुरू हो चुकी है जिससे अतिरिक्त सतर्कता बरने के आदेश दिये गये हैं। केन्द्रीय फोर्स के साथ गश्त में वाहनों का प्रयोग कम करने को कहा गया है। सीमा पर चौकसी बढ़ाने के संग दोनों प्रदेश के वायरलेस को एक फ्रीक्वेंसी पर सेट रखने पर चर्चा की गयी। इससे उपयोगी सूचनाओं का आदान-प्रदान हो सकेगा औेर नक्सली मोर्चे के साथ क्राइम फ्रंट पर भी मदद मिलेगी।

डीआईजी ने बढ़ाया फोर्स का मनोबल  

डीआईजी ने कहा कि घात लगा कर धोखे से हमला करना नक्सलियों की रणनीति होती है लेकिन आप इसके लिए पहले से तैयार रहे। प्रदेश में नक्सलियों की कमर तोड़ दी गयी है और उन्हें ढूंढे से भी नया कैडर नहीं मिल रहा है। स्थानीय लोग भी इनकी हकीकत जान चुके हैं लिहाजा वहां से भी कोई सहायता नहीं मिलती। सीमा पर पर्याप्त संख्या में केन्द्रीय पुलिस फोर्स, पीएसी मौजूद है। बस आपस में समन्यवय रखा जाये तो किसी की हिम्मत नहीं कि वह हमले की जुर्रत जुटा सके। बैठक में बिहार-झारखंड से आये प्रतिनिधियों का कहना था कि उनके यहा अभियान चलते है तो नक्सली यूपी की सीमा की तरफ शरण लेने के लिए भागते हैं। इस पर अभियान से पहले सूचना देकर सीमा को सील करने पर सहमति बनी है।

 

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