यूपी और बिहार के विभाग मिले साथ तो हुआ बड़े फर्जीवाड़े का पर्दाफाश, यूं की गयी थी 110 करोड़ की हेरफेरी

वाराणसी। गुण्ड्स एण्ड सर्विसेज टैक्स (जीएसटी) लागू होने के बाद भी करापवंचन तत्व टैक्स चुराने के तमाम नये-नये हथकंडे अपना रहे हैं। ऐसे कर चोरों पर लगाम कसने के लिए लगातार छापेमारी भी की जा रही है। इसी के तहत यूपी और बिहार के वाणिज्य कर विभाग की संयुक्त टीम ने भभुआ (बिहार) में औचक छापेमारी की तो बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ। जांच से स्पष्ट हुआ कि 110 करोड़ की फर्जी इनवायसिंग और 20 करोड़ रुपये की फर्जी आईटीसी का गलत फायदा उठाने का बड़ा खेल चल रहा था। खास यह कि जीएसटी लागू होने के बाद पहली बार दो राज्यों की यह पहली संयुक्त छापेमारी हुई है, जिसमें विभाग को बड़ी सफलता मिली है।

महिला कमिश्नरों ने बनायी यह रणनीति

करापंवचन तत्वों पर नकेल कसने के लिए वाणिज्य कर विभाग के लखनऊ मुख्यालय पर गठित रिसर्च सेल ने भभुआ की एक संदिग्ध फर्म के बारे में पुख्ता प्रमाण यूपी की विभागीय कमिश्नर कामिनी चौहान रतन एवं बिहार की राज्य कर कमिश्नर डा. प्रतिमा को उपलब्ध कराया। रिसर्च सेल की तरफ से उपलब्ध करायी गयी जानकारी के आधार पर यूपी व बिहार की संयुक्त टीम ने भभुआ स्थित ईको सीमेंट नामक कंपनी के कारखाने पर बीते सोमवार को औचक छापेमारी कर गहन जांच-पड़ताल की। जांच के पश्चात चौकाने वाले तथ्य सामने आये। छापेमारी के दौरान यूपी टीम का नेतृत्व एडिशनल कमिश्नर ग्रेड-टू केके वर्मा व जीएस बोनाल एवं बिहार टीम का नेतृत्व एडिशनल कमिश्नर संजय कुमार पंसारी ने किया। छापेमारी टीम में वाराणसी के डिप्टी कमिश्नर अखिलेश सिंह व परमानंद, असिस्टेंट कमिश्नर प्रशांत राय, बृजेंद्र वैश्य व पुष्पेंद्र पटेल आदि थे।

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