वाराणसी। उत्तर प्रदेश में बीजेपी को घेरने के लिए तैयार हो रहा महागठबंधन अब धीरे-धीरे बड़ा रुप लेने लगा है। सपा, बसपा और कांग्रेस के अलावा अब महागठबंधन में छोटी-छोटी पार्टियों को भी लाने की कवायद चल रही है। इसी के तहत स्व. सोनेलाल पटेल की जयंती पर अपना दल (कृष्ण गुट) की ओर से आयोजित सभा में सपा, बसपा, कांग्रेस और आरएलडी के नेता पहुंचे। हालांकि बीजेपी के लिए राहत की बात ये रही कि इस रैली से सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के मुखिया ओमप्रकाश राजभर ने ऐन वक्त पर दूरी बना ली।

पिछड़ों पर महागठबंधन की नजर

एक हफ्ते के अंदर ये दूसरी बार है जब पीएम नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र में विरोधी लामबंद हुए। इसके पहले आम आदमी पार्टी की बेनियाबाग में हुई सभा में बीजेपी के बागी सांसद शत्रुघ्न सिन्हा के अलावा दूसरी पार्टियों के नेता भी अपना समर्थन देने के लिए पहुंचे थे। दरअसल महागठबंधन की नजर पूर्वांचल के पिछड़ी जातियों पर लगी है। खासतौर से कुर्मी, पटेल और राजभर की अच्छी-खासी तादाद में पैठ बनाने के लिए पार्टियों ने अपना दल (कृष्णा गुट) को अपना समर्थन दिया है। वहीं 2019 की तैयारियों में लगी अपना दल ने भी इस रैली के जरिए अपनी सियासी ताकत का एहसास कराया। उसकी कोशिश है कि महागठबंधन में सम्मानजनक स्थान पाने के साथ ही कुछ सीटों पर दावेदारी भी ठोक सके।

ओमप्रकाश राजभर ने लिया यू-टर्न

रविवार की शाम तक ये चर्चा थी कि इस सभा में बीजेपी से नाराज चल रहे ओमप्रकाश राजभर भी शिरकत करेंगे। सुभासपा के कार्यकर्ताओं ने बकायदा तैयारी भी कर रखी थी। लेकिन देर रात अचानक ओमप्रकाश राजभर ने सभा में शिरकत करने से मना कर दिया। सूत्रों के मुताबिक आगामी 4 जुलाई को बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह वाराणसी पहुंच रहे हैं। माना जा रहा है कि ओमप्रकाश राजभर की अमित शाह से बात हुई है। हालांकि सियासी मोर्चे पर ओमप्रकाश राजभर ने अपने सभी पत्ते खोल रखे हैं। चार जुलाई को ही सुभासपा की लखनऊ में एक अहम बैठक होने वाली है। इस बैठक में ये तय किया जाएगा कि 2019 में बीजेपी के साथ गठबंधन कायम रहे या नहीं ?

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