वाराणसी। सोशल मीडिया पर दो दिन से वायरल मैसेज लोगों में जिज्ञासा का केंद्र बना हुआ है। इस राजनीतिक मैसेज में लिखा है कि ‘सुप्रीम कोर्ट में ईवीएम द्वारा हुए इलेक्शन को रद कराने की रिट दायर करने के लिए निम्न नंबर पर 10 लाख लोगों का सपोर्ट चाहिए। मिस्ड काल का कोई चार्ज नहीं लगेगा और इसकी अंतिम तारीख 15 मार्च-17 है। वायरल मैसेज में जो नंबर दिया जा रहा है, वह 8303501000 है।’

 
बसपा कार्यालय का है नंबर
ह्वाट्स एप पर सोमवार और मंगलवार को यह मैसेज जमकर वायरल हुआ। इस मैसेज से बीजेपी विरोधियों में खुशी देखी गई और हर कोई बिना हकीकत जाने उस पर विश्वास कर अपनी-अपनी प्रतिक्रिया देते रहे। कइयों ने उक्त नंबर पर मिस्ड काल भी करना शुरू कर दिया। वहीं, जब इस संदेश की पड़ताल हुई तो इसके बाद का जो सच सामने आया, वह चौंकाने वाला है। दरअसल, यह नंबर बसपा कार्यालय का है, जिसे चुनाव से पहले जारी किया गया था। इस पर मिस कॉल करने से आप बसपा के समर्थक बन जाएंगे। चुनाव रद करने या सुनवाई के लिए ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है, जिसमें मिस कॉल देकर समर्थन जुटाए जा सकें।

 
विकसित देश ईवीएम को रिजेक्ट कर चुके हैं:मायावती
यूपी विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद मायावती ने ईवीएम की विश्वसनीयता पर सवाल उठाने शुरू कर दिए थे। लखनऊ में पार्टी नेताओं के साथ मीटिंग में हार की समीक्षा के दौरान भी ईवीएम पर चर्चा हुई। मायावती ने ईवीएम की बाबत कहा कि, ”विकसित देश ईवीएम को रिजेक्ट कर चुके हैं। बीजेपी अगर ईमानदार है तो दोबारा बैलेट पेपर से चुनाव कराए। ईवीएम की मार्फ़त चुनाव आयोग से अगर उचित जवाब नहीं मिला तो बीएसपी कोर्ट जाएगी। साथ ही देशभर में पार्टी इस मामले को लेकर आंदोलन करेगी।”

 
ईवीएम पर फिर जताया संदेह
लखनऊ में हार के कारणों पर मंथन करने के लिए हुई मीटिंग में ईवीएम से संबंधित पर्चे भी बांटे गए। पर्चे पर लिखा था, ”हर चुनाव में इस्तेमाल होने वाली ईवीएम मशीन भारत सरकार की 2 संस्थाओं B.E.L और E.C.I.L द्वारा बनाई और सप्लाई की जाती है। यह व्यवस्था है कि हर पोलिंग स्टेशन पर मशीन भेजे जाने से पूर्व हर मशीन की जांच की जाती है और हर मशीन को पोलिंग स्टेशन के हिसाब से सेट किया जाता है। यह कार्य हालांकि जिला निर्वाचन अधिकरी की देखरेख में होता है, पर यह कार्य मशीन बनाने वाले इंजीनियरों द्वारा किया जाता है। उन इंजीनियरों के पास यह अवसर होता है कि वे किसी भी मशीन को किसी भी तरह से सेट कर सकते हैं, क्योंकि इन मशीनों का कोई और जानकार मौके पर मौजूद नहीं होता है। चूंकि यह कंपनियां भारत सरकार के अधीन होती हैं। ऐसे में भारत सरकार को नियंत्रित करने वाली राजनीतिक पार्टी के पास मशीनों से छेड़छाड़ करने का अवसर होता है। वर्तमान चुनाव में भी ऐसा होना प्रतीत होता है।”

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