वाराणसी। माफिया से माननीय बने एमएलसी बृजेश सिंह लंबी कानूनी लड़ाई के बाद सिकरौरा कांड से बरी हो गये हैं लेकिन उनकी मुश्किलें अभी खत्म नहीं हुई हैं। इसके बाद गाजीपुर के उसरी चट्टी मामले का सामना करना है जिसमें प्रतिद्वंदी बाहुबली विधायक मुख्तार अंसारी के उपर फायरिंग की गयी थी। मुख्तार इस मामले में गवाह भी है और बृजेश से अदावत जग जाहिर है। उधर सिकरौरा कांड की वादिनी हीरावती के विधिक पैैरोकार राकेश न्यायिक का कहना है कि उन्हें न्यायालय पर पूरा विश्वास है और वह सेशन कोर्ट के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती देंगे।

दोनों तरफ से मारे गये थे एक-एक लोग

मोहम्मदाबाद (गाजीपुर) के उसरी चट्टी में मुख्तार अंसारी 15 जुलाई 2001 की दोपहर काफिले के साथ जा रहे थे तभी ट्रक पर सवार बदमाशों ने अंधाधुंध गोलियां बरसायी थी। मुख्तार के गनर के साथ दूसरे लोगों ने जवाबी फायरिंग की थी। मुख्तार अंसारी के गनर की गोली लगने से मौत हो गई जबकि हमलावर पक्ष से मनोज राय भी मारा गया। इसी मामले में बृजेश सिंह और त्रिभुवन सिंह आरोपी हैं। दोनों के खिलाफ आरोप तय हो चुका है और मामला विचाराधीन है। पांच साल पहले इस मामले के एक गवाह को बृजेश के करीबी अजय मरदह की तरफ से धमकी की भी शिकायत की गयी थी।

दूसरे मामलों में हो चुके हैं बरी

बृजेश के खिलाफ दिल्ली, महाराष्ट्र, गुजरात, उड़ीसा समेत कई राज्यों में मुकदमे दर्ज थे। एक दशक से अधिक समय जेल की सलाखों के पीछे रहते हुए उन्होंने सभी का सामना किया और अधिकांश में बरी हो चुके हैं। कुछ जो बचे हैं उनमें जमानत मिल चुकी है। उसरी चट्टी में जमानत मिल गयी तो बाहर भी आ सकते हैं।

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