वाराणसी। प्रशासनिक हनक के चलते वीडीए ने बिना मुआवजा दिये बड़ी गैवी (भेलूपुर) में सैकड़ो फ्लाट बना कर बेच दिये थे लेकिन हाईकोर्ट के ताजा आदेश से उसे जोर का झटका लगा है। न्यायमूर्ति रणविजय सिंह और न्यायमूर्ति मुख़्तार अहमद की बेंच ने 1988 में बड़ी गैबी आवासीय योजना के तहत बिना मुआबजा दिए सैकड़ो फ्लैट बनाकर बेच दिए जाने के मामले में 10 सप्ताह के अंदर किसानो को करोड़ो का मुआबजा देने का आदेश दिया है। बहरहाल वीडीए अब इसे लेकर नये सिरे से कानूनी लड़ाई की तैयारी में जुटा है।

खतौनी में नाम के बावजूद नहीं दिया था मुआवजा

प्रकरण के मुताबिक जमीन मालिक सूरज प्रकाश सुरेका व गिरधर गोपाल सुरेका ने जरिये मुख्तारे आम एडवोकेट प्रेम प्रकाश गौतम के माध्यम से 22 जून 2015 को कमिश्नर वाराणसी को दये गए आवेदन में कहा कि उसके ओज जोल्हा स्थित आराजी न0 56 तथा 31 में उसके जमीन पर विकास प्राधिकरण ने बड़ी गैबी आवासीय योजना के तहत सैकड़ों फ़्लैट बनाकर बेच दिया गया है, जबकि राजस्व अभिलेख खतौनी में जमीन मालिक के रूप में उसका नाम दर्ज है। ऐसे में पीड़ित किसानो को उनकी जमीन का मुआवजा दिलाया जाय। जिसपर तत्कालीन कमिश्नर ने जिलाधिकारी की अध्यक्षता में एक कमेटी गठित कर दी। इस कमेटी की एक बैठक 9 मार्च 2015 को रायफल क्लब में हुई जिसमे वी डी ए के तरफ से किसी के न आने पर बैठक स्थगित कर दी गई फिर पीड़ित किसानो ने हाईकोर्ट में अधिवक्ता प्रशांत शर्मा के जरिये याचिका की जिसमे सुनवाई के बाद हाइकोर्ट की डबल बेंच ने 10 सप्ताह में किसानो को मुआबजा देने का आदेश दिया।

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