साथ लेकर चल रहे थे असलहों का जखीरा, चेकिंग में धराये तो पुलिस के सामने यह ‘कहानी’ दोहराये

वाराणसी। मादक पदार्थ, सोना या असलहों की तस्करी करने वाले अंतरप्रांतीय गिरोह से जुड़े सदस्यों का ब्योरा पुलिस के पास अमूमन नहीं रहता। दूसरे किसी राज्य के रहने वाले किसी अन्य प्रांत में सप्लाई देने से पहले पकड़े जाते हैं तो वह रटी-रटायी कहानी दोहराते हैं। उनका कहना होता है कि पहली बार चंद रुपयों के लिए वह ऐसा कर रहे थे और स्टेशन पर जिस व्यक्ति ने यह दिया उसे नहीं जानते। कुछ ऐसा ही हुआ जब डीडीयू जीआरपी डीडीयू 24 पिस्टल और 48 मैगजीन के साथ दो असलहा दो तस्करों को धर दबोचा। असलहे भले ही कंट्रीमेड थे लेकिन इन पर मेड इन यूएसए लिखा था। तस्कर इसको हजारीबाग (झारखंड) से मुरादाबाद ले जा रहे थे।

रुटीन चेकिंग में शक के आधार पर धराये

इंसपेक्टर जीआरपी आरके सिंह के मुताबिक डीडीयू पर रूटीन चेकिंग की जा रही थी। इस दौरान प्लेटफार्म संख्या तीन/चार पर दो संदिग्ध व्यक्ति नजर आए जिनके पास तीन पिट्ठू बैग थे जो काफी भारी लग रहे थे। शक पर पुलिस ने जांच पड़ताल की तो बैग में रखे असलहे के जखीरे को देखकर सकते में आ गयी। गिरफ्तार असलहा तस्कर बोकारो (झारखंड) निवासी जमालुद्दीन व सलीम हैं। पकड़े गए तस्करों ने बताया कि उन्हें हजारीबाग रेलवे स्टेशन पर एक व्यक्ति आ कर असलहों से भरा यह बैग दिया जिसे उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद पहुंचा देने की हिदायत दी गई। तस्करों के मुताबिक इन असलहो को पहुंचाने के एवज में उन्हें चंद रुपए मिलते। हालांकि वे पहली बार हथियारों की सप्लाई के लिए जा रहे थे।

कुछ दूरी पर था पीएम मोदी का कार्यक्रम

गौरतलब है कि पीडीडीयू जक्शन से कुछ दूरी पर पीएम मोदी का कार्यक्रम आयोजित था। गिरफ्तार तस्करों ने भले अपनी तरफ से रटी-रटायी कहानी जीआरपी को सुना दी हो लेकिन भारी मात्रा में असलहों की बरामदगी की सूचना पर खुफिया विभाग की विभिन्न इकाइयों से जुड़े अधिकारी भी पूछताछ के लिए पहुंचे थे। फिलहाल तस्करों के बाबत झारखंड पुलिस से सम्पर्क कर जानकारी जुटायी जा रही है। कहना न होगा कि इससे पहले भी कई बार भारी मात्रा में तस्करी कर ले जाए जा रहे असलहे बरामद किए गए लेकिन सप्लाई करने वाले बडे सरगना हमेशा गिरफ्त के बाहर रहे।

उल्लेखनीय है कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय रेलवे जंक्शन पर पहले भी कई बार भारी मात्रा में तस्करी कर ले जाए जा रहे असलहे बरामद किए गए । लेकिन बड़ा सवाल यह है कि पुलिस कैरियर को तो पकड़ लेती है लेकिन असली मुजरिम तक पहुंच पाती है या नहीं ।

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