लखनऊ। मुन्ना बजरंगी के करीबी कहे जाने वाले ठेकेदार तारिक की हत्या के तीसरे दिन ही उसकी पत्नी होने का दावा करने वाली ताहिरा ने यू टर्न ले लिया है जिससे मामले में नया मोड आ गया है। वारदात के तीसरे दिन पुलिस की पूछताछ में ताहिरा का कहना था कि उसने किसी का नाम नहीं लिया था। तारिक के ‘परिचित’ ने नाम लिया और इस आशय की तहरीर लिखी। बदहवासी में उसने साइन कर दिया था। पुलिस सूत्रों का कहना है कि ताहिरा अब नामजदगी को अज्ञात में तरमीम कराना चाह रही है लेकिन इसकी असली वजह क्या है पता नहीं। आशंका जतायी जा रही है कि तारिक के बाद असुरक्षित जीवन और आरोपितों की तरफ से दबाव के चलते भी ऐसा हो सकता है। तेजी से बदलते घटनाक्रम से केस की बुनियाद हिलती जा रही है। बावजूद इसके पुलिस नामजद प्रदीप सिंह के अलावा संदिग्ध शूटरों की तलाश में पूर्वांचल तक छापेमारी के लिए टीम भेज चुकी है।

ठेका बजरंगी की फर्म का, काम देखता था तारिक

वारदात के बाद गाजीपुर के जिस बस स्टैंड के ठेके को लेकर रंजिश की आशंका जतायी गयी थी उसकी पड़ताल में पुलिस को दूसरी जानकारी मिली है। पुलिस का कहना है कि यह ठेका मुन्ना बजरंगी की फर्म के नाम हुआ था। बजरंगी के जेल में रहने के चलते जिस तरह तारिक उसके दूसरे कामों को जिम्मेदारी संभालता था उसी तरह यहां का भी काम देखता था। इस टेंडर में दूसरे माफिया और बाहुबलियों की दिलचस्पी थी लेकिन तारिक ने सब कुछ इस तरह मैनेज किया था कि किसी को मौका नहीं मिल सका। एसटीएफ ने परिवहन विभाग से टेंडर डालने वाले दूसरे ठेकेदारों के नाम परिवहन विभाग से मांगे हैं लेकिन अब तक इसे उपलब्ध नहीं कराया गया है।

अपनी फर्म के लिए प्रयासरत था तारिक

मामले की जांच के दौरान एसटीएफ को कई चौंकाने वाली जानकारियां मिली है। एसटीएफ सूत्रों की माने तो लंबे समय तक दूसरों के लिए काम देखने के बाद तारिक अपनी फर्म का खुद मालिक बनने की कोशिश कर रहा था। इसके लिए उसने आवेदन कर रखा था लेकिन लखनऊ में जमीन न होने की बाधा आड़े रही थी। फर्म के रजिस्ट्रेशन की खातिर तारिक ने जमीन खरीद को प्रापर्टी डीलर को खासा एडवांस दे रखा था। तारिक की अपनी फर्म होती तो ठेकेदारी में पहले से स्थापित कई लोगों के लिए वह बड़ी चुनौती के रूप में सामने आता। यह भी आशंका जतायी जा रही है कि इसकी भी भनक लगने के बाद उसे रास्ते से हटाने का फैसला लिया गया।

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