इस वर्ष गुरु पूर्णिमा पर चन्द्रग्रहण की छाया, जानिए ग्रहण का प्रभाव और समय

वाराणसी। चन्द्रादि ग्रहों में अपना स्वयं का प्रकाश तो होता नही है, वे सूर्य की किरणों के संयोग होने से मिलने वाले प्रकाश के कारण से चमकते हैं। अर्थात चन्द्र बिम्ब के जितने भाग पर सूर्य की किरणें पड़ती है उतना ही भाग प्रकाशित होता है। शेष भाग अन्धकार के रूप में ही रहता है। सूर्य की किरणें सभी ओर समान रूप से फैलती है तथा सूर्य से कम मान होने के कारण, भू बिम्ब से रोके जाने से आकाश में अन्धकार के रूप में सूची( सूई जैसी नोक) जैसा आकार बनती है। वही पृथ्वी की छाया का अन्धकार स्वरूप राहु कहलाता है, इसे ही भूभा करके हैं। वह सूचीकार बहुत दीर्घ होने से चन्द्र कक्षा से भी दूर तक जाती है, लेकिन सूर्य के क्रान्तिवृत्त में भ्रमण करने से सामने रहने वाली सूची(भूभा) चन्द्र कक्षा में स्थित क्रान्तिवृत्त से लगी होती है। जब चन्द्रमा अपनी गति से चलता हुआ अपने विमण्डल वृत्त में उस भूभा में प्रवेश करता है तो चन्द्र बिम्ब पर सूर्य बिम्ब की किरणें नही पड़ पाती जिससे चन्द्र बिम्ब के उस भाग में प्रकाश नही होता। उस समय क्रान्तिवृत्त एवं विमण्डल वृत्त के अन्तराभाव होने से उनका दक्षिणोत्तर अन्तर नही होता तथा भूभा एवं चन्द्र बिम्ब के राश्यादि मान समान होने से उनका पूर्वापरान्तर नही होता जिससे चन्द्र बिम्ब में स्थित भूभा ग्राहक, ग्राह्य चन्द्र बिम्ब का ग्रहण करती है तभी चन्द्र ग्रहण होता है। ऐसी स्थिति पूर्णिमान्तकाल में होती है। पूर्णिमान्तकाल में भू बिम्ब से दोनों ओर सूर्य एवं चन्द्र बिम्बों की स्थिति एक दूसरे से 180 अंश अर्थात 6 राशि के अन्तर पर होती है।

पूरे भारत में दिखेगा खण्डग्रास चंंद्रग्रहण

बीएचयू ज्योतिष विभाग के ज्योतिषाचार्य पं. गणेश प्रसाद मिश्र के मुताबिक आषाढ़ शुक्ल पूर्णिमा मंगलवार 16/17 जुलाई 2019 को लगने वाला चन्द्रग्रहण भारत में खण्डग्रास चन्द्रग्रहण के रुप में दृश्य होगा। भारतीय मानक समयानुसार ग्रहण का प्रारंभ रात्रि 1 बजकर 31 मिनट पर, ग्रहण का मध्य रात्रि 3 बजकर 1 मिनट पर तथा मोक्ष रात्रि 4 बजकर 30 मिनट पर होगा। ग्रहण का स्पर्श, मध्य, मोक्ष पूरे भारत में दृश्य होगा। सम्पूर्ण ग्रहण अवधि 2 घण्टा 59 मिनट है। चन्द्र ग्रहण में ग्रहण से 9 घंटे पूर्व सूतक होता है। जो दिन में 4:30 से ग्रहण समाप्त होने तक रहेगा।

विदेशों में दिखेगा चंद्रग्रहण

भारत के अतिरिक्त यह ग्रहण आस्ट्रेलिया, एशिया (उत्तर-पूर्वी भाग को छोड़ कर), अफ्रीका, यूरोप, उत्तरी ( स्कैनडिनाविया के अधिकांश भाग को छोड़ कर) तथा दक्षिणी अमेरिका के अधिकांश भाग में दिखाई देगा। चन्द्रास्त के समय ग्रहण का प्रारम्भ न्यूजीलैण्ड के कुछ भाग, आस्ट्रेलिया के पूर्वी भाग, उत्तर तथा दक्षिण कोरिया, चीन के उत्तरी भाग तथा रूस के कुछ भाग में दिखाई देगा। चन्द्रोदय के समय ग्रहण का अन्त अर्जेन्टिना, चिली, बोलीविया, ब्राजील के पश्चिमी भाग, पेरु तथा, उत्तरी अटलांटिक महासागर में दिखाई देगा।

Related posts