इस बार अश्व पर आ रहीं हैं मां दुर्गा, दो शनिवार ला रहे हैं यह खुशियां लेकिन कलश स्थापना के लिए समय मिनटों का

वाराणसी। चैत्र शुक्ल पक्ष बड़े महत्व का पक्ष होता है। इसमें नौ दिनों तक आद्याशक्ति भगवती का व्रत और श्रीदुर्गाशप्तशती का पाठ करने से आध्यात्मिक,आधिभौतिक दोषों पर विजय प्राप्त करने में बड़ी सहायता मिलती है। यह नवरात्र वासन्तिक नवरात्र कहलाता है। इस बार मां दुर्गा 6 अप्रैल शनिवार के दिन अश्व( घोड़े) पर सवार होकर आ रही हैं। यह नवरात्रि 8 दिन की है। शनिवार को शुरू हो जाने के चलते पूरा संयोग ही बेहद शुभ साबित होने वाला है क्योंकि जब भी 8 दिन नवरात्रि मनाई जाती है तो यह दिन शक्ति की उपासना के लिए बेहद शुभ होते हैं। शनिवार 6 अप्रैल को दिनभर वैधृति योग है । वैधृति में कलश स्थापन आदि का निषेध है। अत: अभिजित मुहूर्त में दिन 11 बजकर 35 मिनट से दिन 12 बजकर 24 मिनट तक ही कलश स्थापन होगी।

ग्रहों के योग से भी शुभ संयोग

बीएचयू ज्योतिष विभाग के ज्योतिषाचार्य पं. गणेश प्रसाद मिश्र के मुताबिक आठ दिन की नवरात्रि में दो शनिवार आएंगे यह अत्यंत शुभ संयोग है क्योंकि शनिवार को दुर्गा पूजा का हजार, लाख गुना नहीं करोड़ गुना फल मिलता है। ग्रह स्थिति में स्वगृही गुरु, उच्च स्थान का राहु आदि योग से नवरात्रि अत्यंत शुभ मानी जा रही है।

एक ही दिन अष्ठमी और रामनवमी

चैत्र शुक्ल नवमी को रामनवमी होती है। मध्यान्ह व्यापिनी नवमी में रामनवमी व्रत किया जाता है। इस वर्ष अष्टमी शनिवार 13 अप्रैल को दिन 8 बजकर 16 मिनट तक ही है। उसके बाद नवमी लग रही है जो मध्याह्न काल में है तथा दूसरे दिन रविवार को नवमी प्रात: 6 बजे तक ही है। त्रिमुहूर्ताल्प है। इसके दूसरे दिन सोमवार को एकादशी व्रत भी है। इस कारण से महाष्टमी और रामनवमी दोनो व्रत शनिवार 13 अप्रैल को ही मनाया जायेगा तथा व्रत का पारण 14 अप्रैल को प्रात: 6 बजे के बाद होगा।

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