बागपत। जौनपुर के पूर्व सांसद धनंजय सिंह भी बाहुबली की श्रेणी में आते हैं और माफिया डॉन मुन्ना बजरंगी से उनकी कभी जमी नहीं। अलबत्ता छात्र जीवन से धनंजय के विरोधी माने जाने वाले पूर्व विधायक अभय सिंह से लेकर दूसरे से बजरंगी के नजदीकी रिश्ते रहे। जेल में पति की हत्या के बाद पहुंची सीमा सिंह ने पूूर्व सांसद को इसका जिम्मेदार ठहराया है। सीमा ने अपने भाई पुष्पजीत उर्फ पीजे से लेकर करीबी रहे तारिक की हत्या का ब्योरा देते हुए कहा कि पहले से इसकी आशंका जतायी जा रही थी जो अंतत: सच साबित हुई। कारण पूछे जाने पर सीमा का कहना था कि धनंजय नहीं चाहते थे कि बजरंगी या वह खुद विधायक बने। उन्हें अपने राजनैतिक वजूद पर खतरा दिख रहा था जिसके चलते विरोधियों से मिल कर इस वारदात की साजिश रची। सीमा ने इस आशय का प्रार्थनापत्र संबंधित थाने पर देने के साथ विवेचना में इन तथ्यों को शामिल करने की गुजारिश की है।

‘करीबी’ रह चुके भाई मेराज को भी नहीं बख्शा

सीमा ने इंस्पेक्टर खेड़का को जो प्रार्थनापत्र दिया है उसमें किसी समय मुन्ना के अत्यंत निकट रहे भाई मेराज का नाम भी शामिल किया है। गौरतलब है कि भाई मेराज को दिल्ली पुलिस ने मुन्ना बजरंगी की खातिर वसूली के आरोप में उठाया था। कई साल तक तिहाड़ जेल में रहने के बाद किसी तरह मुक्ति मिली। कहा जाता है कि लंबे समय तक जब बजरंगी को शक्ल से कोई पहचानता भी नहीं था तब मेराज से करीबी रिश्ते रहे। यही नहीं एसटीएफ के साथ मुठभेड़ में कई गोलियां लगने के बाद बजरंगी के आसपास अस्पताल में दिखने वालों में वह भी था।

फिर से दोहराये पुराने आरोप

सीमा सिंह ने अपने भाई और ठेकेदार तारिक की हत्या के मामले में जिन लोगों आरोप लगाये थे उन्हें फिर से दोहरा दिये। रिटायर्ड सीओ जीएन सिंह से लेकर उनके पुत्र को लेकर सीमा पहलेभी कई बार यहीं तोहमत लगा चुकी है कि समूचे घटनाक्रम को लेकर इनका हाथ है। वजह वह खुल कर बताने से बचती रही लेकिन आशंका जतायी कि शासन-प्रशासन से लेकर राजनेता तक इस हत्याकांड में शामिल रहे हैं। सीमा कुछ इस कदर व्यथित दिखी कि केन्द्रीय मंत्री मनोज सिन्हा से लेकर विधायक अलका राय तक किसी को नहीं बख्शा।

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