सोशल मीडिया चल रही जोरदार तकरार, मनोज सिन्हा नहीं बल्कि ‘विकास’ की हुई है हार

गाजीपुर। प्रदेश की जिन हाइप्रोफाइल सीटों पर दिल्ली तक की नजर थी उनमें से सदर सीट भी शामिल थी। पिछले विधानसभा चुनावों के बार सीएम पद के प्रमुख दावेदार की टक्कर बाहुबली विधायक मुख्तार अंसारी के भाई अफजाल से थी। पिछले पांच सालों में मनोज सिन्हा ने विकास कार्यो पर पूरा ध्यान दिया था और चुनाव के दौरान इसी का वास्ता देकर वह लड़ रहे थे। नतीजे आये तो उनकी करारी हार हुई थी जबकि अफजाल जबरदस्त जीत हुई थी। सोशल मीडिया पर इसे लेकर जमकर बहस चल रही है। बड़ी संख्या में लोगों का कहना है कि गाजीपुर के लोगों को जात पर ही वोट देना है तो विकास को अब पांच सालों के लिए भूल जाये। साफ है केन्द्र और प्रदेश में भाजपा की सरकार है और अफजाल के लिए कोई काम करना आसान नहीं है।

वाई सुरक्षा और हेलीकाप्टर की चर्चा

मनोज सिन्हा की हार के पीछे उन नेताओं को भी जिम्मेदार ठहराया जा रहा है जिन्होंने भाजपा नेता के रूप में वाई श्रेणी की सुरक्षा ही नहीं हासिल की बल्कि हेलीकाप्टर से भी घूमते रहे। बावजूद इसके उनके इलाकों में भाजपा साफ हो गयी। स्पष्ट है कि हवाई नेताओं ने भाजपा का भला भले न किया हो लेकिन उनके चलते नुकसान अधिक हुआ है।

राहत महसूस कर रहा अंसारी परिवार

अपनी परम्परागत सीट मोहम्मदाबाद तक से पराजय के बाद अंसारी परिवार खासे दबाव में था। इस जीत से उसे संजीवनी हासिल हुई है। अफजाल अंसारी भी पिछले दो लोकसभा चुनाव में पराजय का सामना कर चुके थे और माना जा रहा था कि इसमे जीत नहीं मिली तो यह उनका अंतिम चुनाव हो सकता है। दूसरी तरफ भाजपा विधायक कृष्णानंद राय समेत सात लोगों की हत्या समेत दूसरे कई मामलों में जिस तरह शिकंजा सकता जा रहा है उससे परिवार खासे दबाव में था।

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