इलाहाबाद। सैयदराजा (चंदौली) के भाजपा विधायक सुशील सिंह की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। एक तरफ तो इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बसपा नेता राम बिहारी चौबे हत्याकांड में उनके खिलाफ दर्ज मामलों की मौजूदा स्थिति के साथ प्रदेश के मुख्य सचिव को तलब किया है तो दूसरी तरफ इस मामले में हत्यारोपित अजय मरदह की सभी मामलों में जमानत निरस्त कराने का प्रदेश शासन को निर्देश दिया है। हाईकोर्ट का कहना था कि अजय मरदह का दो दशक पुराना आपराधिक इतिहास है और जमानत पर छूटने के बाद नये मामले शर्तो का उल्लघंन है। खास यह कि अजय मरदह कई मामलों में जमानत पर चल रहे हैं और निरस्तीकरण की प्रतिक्रिया आरम्भ होने के बाद उन्हें लंबे समय तक जेल की सलाखों के पीछे रहना हो सकता है।

स्व. चौबे के पुत्र ने दाखिल की थी याचिका

गौरतलब है कि श्रीकंठपुर (चौबेपुर) निवासी रामबिहारी चौबे लंबे समय तक कपसेठी हाउस के करीबी रहे। उनके उपर जानलेवा हमला भी दो दशक पहले हुआ था। रिश्तों में खटास 2012 के विधानसभा चुनावों के समय आयी जब वह सकलडीहा क्षेत्र से सुशील के मुकाबले बसपा टिकट पर मैदान में उतरे। चुनाव में पराजय के बाद खाई बढ़ती गयी लेकिन एमएलसी बृजेश सिंह के रिश्तों पर कोई असर नहीं पड़ा। पिछले साल चौबे हत्याकांड में अजय मरदह को गिरफ्तार करने की खातिर चौबेपुर पुलिस पहुंची तो विरोध करने की खातिर सुशील खुद पहुंच गये। इसके बाद एक-दूसरे के खिलाफ खुल कर बयानबाजी के संग कानूनी जंग शुरू गयी जिसके तहत याचिका दायर हुई है।

डबल बेंच का आदेश

न्यायमूर्ति राकेश सिन्हा और न्यायमूर्ति दिनेश कुमार सिंह की बेंच ने इस मामले में आदेश दिये जिसके बाद जमानत निरस्तीकरण के लिए प्रदेश शासन सक्रिय हो गया। वाराणसी ही नहीं भदोही के जिन मामलों में जमानत मिली है उस पर विधिक कार्रवाई आरम्ङ हो चुकी है। सूत्रों की माने तो कोर्ट का सख्त का रुख देखते हुए कड़ी कार्रवाई हो सकती है।

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