देव दीपावली तक अतुल राय के छूटने के आसार नहीं, हाइकोर्ट से जमानत में फंस सकता है पेंच

प्रयागराज। घोसी के नवनिर्वाचित सांसद अतुल राय देश के इकलौते ऐसे जनप्रतिनिधि होंगे जो निर्वाचित होने के महीनों बाद भी सदन में उपस्थित होना तो दूर अभी शपथ तक नहीं ले सके हैं। वजह, दुष्कर्म के मामले में आरोपित होने के चलते वह जेल की सलाखों के पीछे निरुद्ध हैं। सेशन कोर्ट से जमानत अर्जी खारिज होने के बाद हाईकोर्ट में अपील की गयी है। शुक्रवार को जमानत अर्जी पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा ने एसएसपी वाराणसी से इस मामले में हलफनामा मांगा है। इसमें अतुल राय की हिस्ट्रीशीट और आपराधिक इतिहास तलब किया गया है। कोर्ट ने पूछा है कि कितने पुराने थे और कितने चल रहे हैं। इस मामले में सुनवाई के लिए 15 नवंबर की तारिख नियत की गयी है। इससे साफ हो गया कि अतुल राय को दीपावली ही नहीं बल्कि देव दीपावली तक सलाखों के पीछे रहना है।

शीतकालीन सत्र में भी भाग लेने पर सस्पेंस बरकरार

बचाव पक्ष से वादिनी के अधिवक्ता विनय शरण और सुदिष्ट सिंह की तरफ से सर्वोच्च न्यायालय की रूलिंग लगायी गयी है। इसमें उत्तर प्रदेश के पूर्व कैबिनेट मंत्री रह चुके अमरमणि त्रिपाठी और बिहार के राजबल्लभ यादव के मामले का हवाला देते हुए जमानत न देने का अनुरोध किया गया है। खास यह कि संसद का शीतकालीन सत्र 18 नवंबर से आरम्भ होने वाला है जो 24 दिसंबर तक चलेगा। अतुल राय को जमानत मिल गयी तो वह इसमें शामिल होकर शपथ ले सकेंगे।

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