हेराफेरी में फंसे वीडीए के तत्कालीन सहायक सम्पति अधिकारी, आवंटित आवास दूसरे के नाम करने पर मुकदमा

वाराणसी। अब तक तो दूसरे की जमीन-मकान को फर्जी तरीके से अपने नाम करान ेके मामले प्रकाश में आते थे लेकिन वाराणसी विकास प्राधिकरण में ऐसा हो गया। पीड़ित ने आला अधिकारियों से गुहार लगायी लेकिन कहीं सुनवाई नहीं हुई। लाचार होकर कोर्ट का रुख करना पड़ा। धोखाधड़ी कर वर्ष 1991 में आवंटित आवास को पत्रावलियों में कूट रचना करते हुए अन्य के नाम करने के मामले में कोर्ट ने सख्त रुख अख्तियार किया है। न्यायालय के आदेश पर तत्कालीन सहायक सम्पत्ति अधिकारी, सादाब खान,सगीर अहमद व अन्य के खिलाफ कैण्ट में मुकदमा दर्ज कराया गया।

ऐसे हुआ फर्जीवाड़े का खुलासा

अमाई मीरगंज निवासी गिरजा शंकर दुबे ने 1991 में आवासीय योजना के अंतर्गत पाण्डेपुर में फ्लैट संख्या ई 40 आवंटित हुआ था। इसके देखरेख के लिए उन्होंने पड़ोसी दिलीप सोनकर को रखा था। एक माह पूर्व दिलीप ने बताया कि फ्लैट में कोई श्रीवास्तव रहने आया है। जानकारी होने पर जब विकास प्राधिकरण से इस बार मे जानकिरी ली तो पता चला कि कोई अज्ञात व्यक्ति गिरजा शंकर बन कर 18 जुलाई 2014 को ही पत्रावली में हेराफेरी करके तथा सहायक सम्पत्ति अधिकारी को मिलाकर अर्दली बाजार डिठौरी महाल निवासीनी सुषमा श्रीवास्तव पत्नी संजय के नाम आवंटित कर दिया गया है। अधिकारियों से शिकायत के बाद कोई करवाई न होने के कारण न्यायालय में गुहार लगायी। न्यायालय के आदेश पर फर्जीवाड़े की धाराओं के तहत रिपोर्ट दर्ज कर पुलिस विवेचना कर रही है।

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