फंसा तकनीकी पेंच तो सुधाकर ‘साइकिल’ से उतर कर हुए ‘पैदल’, जिसने दिलाया ध्यान उसी पर ‘आरोप’ तमाम

मऊ। जैसी की पहले से आशंका जतायी जा रही थी घोसी विधानसभा उपचुनाव में सपा प्रत्याशी सुधाकर सिंह का नामांकन निरस्त हो गया। दरअसल सुधाकर ने पार्टी के सिंबल के लिए जो फार्म बी दाखिल किया था उस पर राष्ट्रीय अध्यक्ष के हस्ताक्षर ही नहीं थे। सुधाकर तो नामांकन कर लौट चुके थे लेकिन रिटर्निग अफसर (निर्वाचन अधिकारी) विजय मिश्र ने उन्हें फोन कर बुलाने के संग इस तकनीकी खामी की तरफ ध्यान दिलाया। आनन-फानन में व्हाट्सएप से लेकर ई-मेल के जरिये दूसरा फार्म बी मंगाया गया लेकिन तकनीकी खामी के चलते इसे स्वीकार नहीं किया गया। आनन-फानन में निर्दल के तौर पर दूसरा पर्चा भर गया जिसका नतीजा है कि चुनावी मैदान में सपा प्रत्याशी बगैर सिंबल के रहेंगे।

विरोध-प्रदर्शन कर बनाया था दबाव

सपाइयों को पूरी आशंका थी कि नामांकन निरस्त हो सकता है लिहजा उन्होंने सुबह से विरोध-प्रदर्शन कर दबााव बनाने का प्रयास किया था। फागू चौौहान के राज्यपाल बनाये जाने के चलते रिक्त हुई घोसी विधानसभा सीट से उपचुनाव में कुल सीट से 15 लोगों ने नामांकन किया था, इनमें दो प्रत्याशियों का नामांकन निरस्त कर दिया गया। जांच में कुल 13 प्रत्याशियों के परचे वैध पाए गए हैं जिसमें निर्दल के रूप में सुधाकर सिंह भी शमिल है। अब सपाई रिटर्निंग अफसर पर आरोप लगा रहे हैं कि वह भाजपा के एजेंट के रूप में काम कर रहे हैं। 

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