भदोही। टैट समेत दूसरी एक दिवसीय प्रतियोगी परीक्षाओं का पेपर आउट कराने वाले गिरोह का मुख्य सदस्य गणेश मौर्य दो दिन पहले एसटीएफ के चंगुल से बच निकलने में सफल रहा लेकिन सोमवार को भदोही क्राइम ब्रांच ने धर-दबोचा। मेजा (इलाहाबाद) निवासी सरगना मनीष मिश्र समेत गिरोह के चार सदस्यों की गिरफ्तारी के बाद कमान गणेश के बाथ में थी। एसपी भदोही सचीन्द्र पटेल ने मीडिया के सामने गिरफ्तार आरोपित को पेश करते हुए चौंकाने वाले खुलासे किये। गिरोह 4-5 लाख रुपये प्रति परीक्षार्थी वसूलता था और इलेक्ट्रानिक्स डिवाइस के माध्यम से पेपर को साल्वर की मदद से उत्तर बता दिये जाते थे। गणेश के पास से डेढ़ लाख रुपये नकदी के अलावा पांच इलेक्ट्रानिक्स डिवाइस, 10 मोबाइल फोन तथा 7 फर्जी नाम-पते पर प्री एक्टिवेटेटड सिमकार्ड बरामद हुए हैं।
यूूं होता था पेपर साल्व करने का धंधा
एसपी के मुताबिक स्वाट टीम प्रभारी अजय सिंह के हत्थे चढ़ा गणेश मूल रूप से मिर्जामुराद निवासी है। उसने पूर्वांचल के कई जिलों में अपना नेटवर्क फैला रखा था। प्रतियोगी परीक्षा से पहले जिन लोगों से गणेश पैसा लेता था उन्हें इलेक्ट्रानिक्स डिवाइस के संग फर्जी नाम-पते का सिमकार्ड लगा मोबाइल देता था। डिवाइस को अभ्यार्थी छिपा लेता था जबकि मोबाइल आन स्थिति में जमा करता था। इसकी क्षमता 300 मीटर की होती जिसके भीतर गणेश पेपर को साल्व करने वाले को लेकर मौजूद रहता था। जिन प्रश्नों के उत्तर पूछने होते अभ्यर्थी पढ़ता और दूसरी तरफ से जवाब मिल जाता।
आसपास के प्रांतो तक परीक्षा पास करता
गिरोह के चार सदस्यों की इलाहाबाद में एसटीएफ दो दिन पहले गिरफ्तार की थी जिस दौरान मास्टरमाइंड गणेश आंख में धूल झोंककर मौके से फरार हुआ था। कर्नलगंज थाने में दर्ज मुकदमे में वह वांछित चल रहा है। गणेश ने कबूल किया कि उसने दर्जनों लोगों को सरकारी नौकरी दिला दी है। इस गोरखधंधे का नेटवर्क वाराणसी,इलाहाबाद, मीरजापुर और भदोही में फैला है लेकिन आसपास के प्रांतों में भी उसने परीक्षा पास करायी है। क्राइम ब्रांच और इंस्पेक्टर उंज सुनील कुमार वर्मा की टीम ने एसपी ने पुरस्कृत करने की घोषणा की है।

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