सुप्रीम कोर्ट तक से नहीं मिली राहत तो न्यायिक मजिस्ट्रेट के यहां दी अर्जी, तय हुआ फरारी में चुनाव

वाराणसी। ऐसा पूर्वाचल में पहली बार हो रहा है जब किसी प्रमुख दल के प्रत्याशी का पता नहीं है और चुनाव में उसकी खैतिर दो-दो पूर्व मुख्यमंत्री वोट मांग रहे हैं। दुष्कर्म के मामले में फरार घोषित घोसी के सपा-बसपा गठबंधन प्रत्याशी अतुल राय ने हाइकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक से गुहार लगायी लेकिन कहीं से राहत नहीं मिली। दूसरा कोई रास्ता नहीं बचा तो कोर्ट में आत्मसमर्पण करने के लिए न्यायिक मजिस्ट्रेट (प्रथम) आशुतोष तिवारी की अदालत में अतुल राय की तरफ से प्रार्थना पत्र दिया गया है। अतुल राय की ओर से बनारस बार एसोसिएशन के पूर्व उपाध्यक्ष व वरिष्ठ अधिवक्ता अनुज यादव ने अदालत में इस आशय का प्रार्थना पत्र दिया है। अदालत ने प्रार्थना पत्र पर सुनवाई करते हुए 28 मई को लंका थाने से रिपोर्ट तलब की है। माना जा रहा है कि पुलिस अतुल राय की कुर्की की फिराक में लगी थी जिससे बचने की खातिर समर्पण की बात कही गयी।

सलाखों के पीछे से ‘गुरु’ लगते रहे चुनाव

गौरतलब है कि अतुल राय को मऊ सदर के बाहुबली विधायक मुख्तार अंसारी का करीबी माना जाता है। मुख्तार भी पिछले डेढ़ दशक से सलाखों के पीछे हैं लेकिन लोकसभा से लेकर विधानसभा तक का चुनाव लड़ा है। बाहुबली विधायक सुशील सिंह ने पहला चुनाव जीता था वह भी सलाखों के पीछे थे। उदयभान डाक्टर ने भी जेल से चुनाव लड़ा लेकिन जीत के बाद सजा होने पर सदस्यता से बर्खास्त कर दिया गया। जेल से चुनाव लड़ने के कई दूसरे मामले भी हैं लेकिन पहली बार फरारी की दशा में चुनाव लड़ा जा रहा है।

कानूनी दांव पेंच में फंसा मामला

जिस युवती की तहरीर पर लंका पुलिस दुष्कर्म-धोखाधड़ी समेत संगीन धाराओं के तहत मुकदमा कायम कर अतुल राय को गिरफ्तार करने के लिए तलाश की जा रही उसके खिलाफ भी इसी कोर्ट ने मुकदमा कायम करने का आदेश दिया है। अतुल राय की तरफ से कोर्ट में दलील दी गयी है कि उनके खिलाफ लंका थाने में फर्जी तरीके से मुकदमा दर्ज कराया गया है। अतुल राय अदालत में समर्पण करने को तैयार है। ऐसी परिस्थिति में अतुल राय के खिलाफ दर्ज मुकदमे की प्रति तथा सम्पूर्ण केस डायरी लंका थाने से तलब कराया जाय, जिससे वह आत्मसमर्पण कर सके।

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