वाराणसी। कुख्यात रईस बनारसी एक दशक से अधिक समय तक आतंक का पर्याय रहा। सनसनीखेज वारदातों को अंजाम देकर उसने खौफ कायम किया था। कई जिलों की पुलिस के संग एसटीएफ उसके पीछे पड़ी थी। उसके अचानक खात्मे के बाद लोगों के जेहन में एक दशक पुरानी वारदात कौंध गयी। कुछ इसी तरह अपने समय में रमेश उर्फ बाबू यादव का आतंक था। रईस की तरह बाबू भी 50 हजार का इनामी रह चुका था। मुन्ना बजरंगी के लेफ्टीनेंट के रूप में बाबू ने उन वारदातों को भी अंजाम दिया था जो रईस के बूते नहीं थी। बाबू भी रईस की तरह अपने विरोधी को खत्म करने के लिए गया था लेकिन क्रास फायरिंग में लगी गोली मौत का सबब बन गयी। अलबत्ता उसकी मौत के बाद कई ‘क्रेडिट’ लेने में पीछे नहीं हटे। पहले तो दावा किया कि उनकी गोली का शिकार रईस हुआ लेकिन सच्चाई सामने आने पर सफाई देने लगे।

शिनाख्त को लेकर कायम रहा सस्पेंस

बाबू यादव सिगरा इलाके में अपने खिलाफ गवाह धर्मेन्द्र उर्फ पप्पू को मारने की खातिर गया था। हमले के दौरान क्रास फायरिंग में उसके चेहरे पर गोली लग गयी। उसके मारे जाने के बाद साथियों को काठ मार गया। दो अन्य को पुलिस ने कुछ देर बाद मुठभेड़ में मार गिराने का दावा किया। बावजूद इसके शिनाख्त को लेकर पेंच दूसरे दिन तक फंसा रहा। वारदात के समय बाबू यादव चयनित पार्षद था और विधानसभा चुनाव की तैयारी कर रहा था। शिनाख्त को लेकर कुछ इसी तरह रईस बनारसी के संग भी था। पुलिस जान रही थी कि गोली का शिकार बनने वाला रईस है लेकिन पुख्ता शिनाख्त से बच रही थी।

पोस्टमार्टम में नहीं मिली गोली, रहस्य बरकरार

पुलिस सूत्रों की माने तो रईस बनारसी की राकेश के साथ फोन पर तकरार हुई थी। एक-दूसरे को समझ लेने का चैलेंज तक दिया गया था। सम्भवत: यही कारण था कि राकेश भी पिस्टल लेकर प्रतीक्षा कर रहा था। सामना होने पर रईस ने गोली चलायी लेकिन राकेश ने भी जबावी फायर कर दिया। गले में लगी एक ही गोली मौत का सबब बन गयी। खास यह कि दोनों के पास से असलहे नहीं मिले। अलबत्ता रईस को लगी गोली पोस्टमार्टम में नहीं मिली जिसके बाद उसके शव को एक्स रे के लिए दोबारा जिला अस्पताल लाया गया। इसके चलते पोस्टमार्टम भी होने को लेकर पेंच फंस गया क्योंकि रात में कलेक्टर की अनुमति के बगैर यह नहीं हो सकता।

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