नौकरशाही को लेकर प्रदेश सरकार का नजरिया उसके फैसलों से स्पष्ट होता, मशक्कत के बाद मुख्य सचिव हुए ‘स्थायी’

लखनऊ। किसी भी प्रदेश की कमान उसके मुख्य सचिव और डीजीपी के हाथ में रहती है लेकिन उत्तर प्रदेश में इसे अरसे से दरकिनार किया जा रहा है। प्रदेश के मुख्य सचिव की कुर्सी महीनों से रिक्त थी और अस्थायी व्यवस्था से काम चलाया जा रहा था। बहरहाल शुक्रवार को प्रदेश सरकार ने आरके तिवारी को स्थायी रूप से मुख्य सचिव नियुक्त करने का फैसला लिया तो अटकलों को विराम लगा। इससे पहले एक प्रभावशाली अपर मुख्य सचिव के इस पद पर आनेकी चर्चाएं जोरों पर थी। बावजूद इसके प्रदेश पुलिस के मुखिया की नियुक्ति पर फैसला अभी नहीं हो सका है। यहां भी अस्थायी इंतजाम से काम चल रहा है और इसी तरह बहाल करने का फैसला हुआ तो सूबे में एक ही ‘टीम’ के हाथ में पूरी कमान होगी।

महीनों लग गये फैसला करने में

योगी सरकार ने आंतत: आरके तिवारी को स्थायी रूप से मुख्य सचिव बनाने का फैसला कर ही लिया। इस पद पर रहे अनूप चंद्र पांडेय के रिटायर्ड होने के बाद से आरके तिवारी कार्यवाहक मुख्य सचिव के रूप में कार्य कर रहे थे। कई महीनों तक काम के बाद उन्हें पूर्णकालिक मुख्य सचिव बना दिया गया है। राज्य सरकार की तरफ से इस संबंध में निर्देश जारी कर दिया गया है। राजेंद्र कुमार तिवारी 1985 बैच के आईएएस अधिकारी हैं। भले की वरिष्ठता क्रम में वह सबसे आगे थे लेकिन इस फैसले को लेने में कई महीने लग गये। अब तक वह मुख्य सचिव पद की कार्यवाहक जिम्मेदारी के साथ ही कृषि उत्पादन आयुक्त एवं अपर मुख्य सचिव उच्च शिक्षा का पद भी संभाल रहे थे।

डीजीपी को लेकर अब भी बना है सस्पेंस

चिंतन,मनन और विमर्श के बाद मुख्य सचिव की नियु्क्ति तो हो गयी लेकिन प्रदेश पुलिस के मुखिया को लेकर अब भी ‘सस्पेंस’ बना है। यहां भी कार्यवाहक के रूप में कमान हितेशचंद्र अवस्थी को सौंपी गयी है। इस पद पर रहे ओपी सिंह ने सेवाविस्तार के लिए भरसक प्रयास किये लेकिन उनके ‘कार्यकाल’ को देखते हुए सरकार ने जोखिम नहीं लिया। पुलिस सूत्रों का दावा है कि उन्हें ही कमान दी जायेगी भले ही फैसला लेने में महीनों का वक्त क्यों न लगे। बहरहाल अस्थायी व्यवस्था के भरोसे चल रहे डीजीपी को इस पद पर बरकरार रखने का फैसला कब होता है सवालों के घेरे में हैं।

Related posts