वाराणसी। बनारस और चंदौली ही नहीं पूर्वांचल के उद्यमियों ने प्रदेश में औद्योगिक विकास को गति देने के लिए सरकार से कड़ा कदम उठाने की गुहार लगायी है। उद्यमियों का मानना है कि इसके लिए सरकार को चाहिए कि वे औद्योगिक विकास के लिए जिम्मेदार फोरमों को कानून के दायरे में लाने का काम करें ताकि लापरवाही बरतने वाले फोरमों के जिम्मेदारों के खिलाफ कड़ी कार्यवाही हो सके। जब तक ऐसा नहीं होगा, तब तक प्रदेश में औद्योगिक विकास की कल्पना करना बेमानी होगा। इंडियन इंडस्ट्री एसोसिएशन (आईआईए) डिवीजनल इकाई की गंगा की लहरों पर बुधवार को हुई खुली बैठक में उद्यमियों ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ईज आॅफ डूइंग बिजनेस को साकार करने में काफी प्रयास कर रहे हैं। इसी का परिणाम है कि भारत ईओडीवी की रैकिंग में 50वें पायदान पर सुधार के साथ आगे बढ़ रहा है। वैसे भी कारोबार करने में जितनी सहूलियत मिलेगी, उद्यमी उतना ही अपना समय उत्पादन गुणवत्ता और विपणन की तरफ लगाएगा और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सफल साबित होगा।

पूर्व की घोषणा पर अमल करे सरकार

उद्यमियों ने कहा कि सरकार अपने पूर्व की घोषणा पर अमल करें तो एसएसएमई सेक्टर को काफी फायदा हो सकता है, जिसमें सरकार ने यूपी पब्लिक प्रक्योरमेंट पॉलिसी के तहत एसएमएसई से 20 प्रतिशत की खरीद सुनिश्चित करने की बात कही थी। दूसरी तरफ सरकारी विभाग और उपक्रम तरह-तरह के प्रतिबंध लगाकर एमएसएमई को खरीद से बाहर रख रहे हैं। इसके कारण एसएसएमई इस योजना का लाभ नहीं ले पा रहे हैं। मेक इन इंडिया की तर्ज पर यूपी में भी बाहरी राज्य की इकाई यदि एल-1 होती है और राज्य की इकाई 20 फीसदी के अंतर में हैं तो राज्य की इकाई एल-1 दाम पर आपूर्ति को राजी हो तो 50 फीसदी सामग्री का कार्य प्रदेश की इकाइयों से ही होना चाहिए। इससे मेक इन इंडिया को बढ़ावा मिलेगा। इतना ही नहीं, एमएसएमई एक्ट 2006 के तहत के्रता को 45 दिनों में भुगतान एमएसएमई को करना होता है अन्यथा चक्रवृद्धि ब्याज लगेगा। लेकिन बहुत से निगम और उपक्रम अपने टेंडर अभिलेख में इसका उल्लेख नहीं करते हैं, जिसका सख्ती से अनुपालन सुनिश्चित कराना नितांत आवश्यक है। अध्यक्षता डिवीजनल चेयरमैन आरके चौधरी ने की।

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