मीरजापुर। मटिहरा जंगल (हलिया) में वन विभाग के वाचर सुरेन्द्र बहादुर सिंह और उसके अधीन लेवराना करने वाली धिराजी उर्फ नन्हकी देवी की हत्या अवैध संबंधों के चलते की गयी थी। हत्यारोपित कोई और नहीं बल्कि नन्हकी का पुत्र मिथलेश कोल था। हत्या में नन्हकी के समधी लक्ष्मण्की भी अहम भूमिका थी और उसी ने मिथलेश को इसके लिए प्रेरित करते हुए योजना तैयार की थी। पिछले माह हुई सनसनीखेज वारदात का खुलासा करते हुए गुरुवार को एसपी आशीष तिवारी ने सहहत्यारोपित लक्ष्मण को मीडिया के सामने पेश किया। एसपी के मुताबिक खुलासे के लिए क्राइम ब्रांच के साथ एसओ अदलहाट विजय प्रताप सिंह को लगाया गया था। इलेक्ट्रानिक साक्ष्य से सुराग मिले थे और लक्ष्मण से कड़ाई से पूछताछ की गयी तो उसने अपना जुर्म कबूल करते हुए सब कुछ बयां कर दिया।

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मछली-दारू की पार्टी में दिया वारदात को अंजाम
पुलिस के सामने लक्ष्मण ने कबूल किया कि सुरेन्द्र बहादुर और नन्हकी के बीच अवैध संबंध आसपास के इलाके में कुख्यात था। बदनामी बढ़ती जा रही थी जिससे उसने रिश्तेदार होने के नाते मिथलेश को टोंका। दोनों को खत्म करने की योजना बनायी गयी। इसके तहत जंगल में मछली-दारू की पार्टी का प्रस्ताव रखा गया। सुरेन्द्र 3 सितंबर को रोज की तरह पौने 10 बजे घर से निकला और रास्ते में मछली बनाने की खातिर तेल-मसाला लेकर अपने प्लाट पर पहुंचा। नन्हकी भी शराब और मछली लेकर वहां पहुंच गयी। दोनों नशे में हो गये तब दोपहर डेढ़ बजे मिथलेश और लक्ष्मण वहां पहुंचे। पेड़ के नीचे सोये सुरेन्द्र का गला फरसे से काट दिया। नन्हकी शोर मचाते हुए भागी लेकिन पीछे से गर्दन पर वार तक उसे भी मौत की नींद सुला दिया। दोनों के शव को पनियहवा नाले में छिपा दिया गया। फरार मिथलेश की गिरफ्तरी के लिए दबिश दी जा रही है।

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