वाराणसी। पिछले दिनों कर्नाटक चुनाव में टीपू सुल्तान को लेकर राजनैतिक दल आमने-सामने थे। मैसूर के सुल्तान का काशी से कोई सरोकार नहीं था लेकिन उससे जुड़ी एक वस्तु शुक्रवार को देखकर लोगों की आंखें फटी रह गयी। अन्तर्राष्ट्रीय संग्रहालय दिवस पर काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के संग्रहालय भारत कला भवन में टीपू सुल्तान के शंख को प्रदर्शित किया गया। 18 वीं शताब्दी के उत्तरार्द्ध का यह शंख 15 इंच लम्बा तथा 10 इंच ऊंचा है। भारत कला भवन के निदेशक प्रो एके सिंह एवं प्रशासनिक अधिकारी व संयुक्त कुलसचिव (विकास) संजय कुमार ने बताया कि युद्ध के पूर्व तथा विजय होने के उपरान्त शासक टीपू सुल्तान इसी शंख से शंखनाध करता था। इसके अगले हिस्से में पीतल मढ़ा है। प्रतीत होता है कि इसी से फूंका जाता था।

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पंडित नेहरू ने रखी थी आधारशिला

प्रो. सिंह ने बताया कि पुरातात्विक दृृष्टि से भारत कला भवन का राष्ट्रीय महत्व का संग्रहालय है। यहां एक लाख 5 हजार दुर्लभ व महत्वपूर्ण आब्जेक्ट है। उन्होने बताया कि कला भवन की नीव 1920 में काशी में भारत कला परिषद के रुप में रखी गयी थी। वर्ष 1950 में यह कमच्छा स्थित परिसर में आरम्भ हुआ। 1962 में वर्तमान में स्थित भारत कला भवन की आधारशिला तत्कालीन देश के प्रधानमंत्री पण्डित जवाहरलाल नेहरु ने रखी थी। काफी दिनों से शंख को स्टोर में रखा था। अब इसे वीथिका में प्रदर्शन के लिए रखा जायेगा।

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