बाहुबली रमाकांत के आने की ‘आहट’ से बढ़ी रंगनाथ समर्थकों की ‘सांसत’, अब भाजपा की उम्मीद सिर्फ ‘एक’ पर टिकी

भदोही। पिछली बार लोकसभा चुनाव में जीत हासिल करने वाली भाजपा ने इस दफा अपना प्रत्याशी बलिया भेज दिया। वीरेन्द्र सिंह मस्त के स्थान पर किये टिकट दिया जाये यह निश्चित ही नहीं हो पा रहा है। सहयोगी दल को देने से लेकर सर्वमान्य प्रत्याशी की तलाश चल रही है। दूसरी तरफ गठबंधन के तहत यह सीट बसपा को मिली है जिसने पिछले महीने ही पूर्व मंत्री रंगनाथ मिश्र को मैदान में उतार कर मनोवैैज्ञानिक बढ़त ले ली थ। चुनाव रंग पकड़ रहा था कि इस बीच कांग्रेस ने एक दिन पहले पार्टी में शामिल होने वाले आजमगढ़ के बाहुबली पूर्व सांसद रमाकांत यादव को मैदान में उतार दिया। गठबंधन को इससे तगड़ा झटका लगा है क्योंकि बसपा प्रत्याशी जिस वोटबैंक के सहारे मैदान में थे वह एकमुश्त कांग्रेस के टिकट पर आने वाले बाहुबली को जा सकता है।

यादव-मुस्लिम की पहली पसंद बाहुबली

भदोही संसदीय क्षेत्र में यादव और मुस्लिम वोटों की संख्या चार लाख से अधिक है। गठबंधन के प्रत्यासी रंगनाथ उनकी पहली पसंद नहीं थे लेकिन विकल्प के आभाव में वह खुल कर प्रतिक्रिया नहीं दे रहे थे। बाहुबली रमाकांत के आने की घोषणा भर से उनका उत्साह बढ़ गया है। वैसे भी बसपा के कोटे में सीट जाने से सपाई खेमा नाराज था और अब खुल कर रमाकांत के साथ आने को तैयार है। रमाकांत के लिए क्षेत्र भले नया हो लेकिन इस वोट बैंट के भरोसे चुनावी नैया पर भी हो सकती है।

‘जनबली’ से ही टक्कर होगी

कांग्रेस प्रत्याशी का नाम शनिवार की शाम औपचारिक रूप से घोषित होने के साथ भाजपा खेमे में मायूसी का माहौल है। ऐसे में उनकी उम्मीदें सिर्फ ज्ञानपुर के बाहुबली विधायक विजय मिश्र पर टिकी है। तीन बार सपा के टिकट पर जीतने वाले विजय मिश्र ने पिछला चुनाव अखिलेश को चुनौती देकर निषाद पार्टी सरीखे क्षेत्रीय दल के बूते जीता था। उनकी पुत्री सीमा मिश्रा पिछली बार सपा प्रत्याशी के रूप में चुनाव मैदान में थी। मोदी लहर के बावजूद कांटे की टक्कर देने के साथ दूसरा स्थान हासिल किया था। राष्ट्रपति से लेकर एमएलसी चुनाव तक विजय मिश्र एनडीए के संग दिखे हैं। उनके समर्थकों का दावा है कि रमाकांत सरीखे बाहुबली का मुकाबला जनबली ही कर सकते हैं। बहरहाल भाजपा ने अपने पत्ते नहीं खोले हैं जबकि विजय मिश्र अपने नवरात्र के अनुष्ठान-यज्ञ में व्यस्त हैं।

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