लखनऊ। माफिया मुन्ना बजरंगी के लेफ्टीनेंट कहे जाने वाले ठेकेदार मोहम्मद तारिक के हत्यारों की तलाश में पुलिस और एसटीएफ पूर्वांचल में कैंप कर रही है। माना जा रहा है वारदात को अंजाम देने वाले बदमाश यहीं के हो सकते हैं। इससे पहले हुई दो दुस्साहसिक वारदात के तरीकों को भी जांच के दायरे में रखा गया है। डिप्टी जेल अनिल त्यागी और धनबाद के डिप्टी मेयर रह चुके नीरज सिंह पर भी इसी तरह पीछा कर गोली बरसायी गयी थी। नीरज भी तारिक की तरह एसयूवी पर सवार थे और वारदात में उनके साथ चार अन्य मारे गये थे। दोनों घटनाओं में रिंकू गिरोह का नाम सामने आया था जिससे जुड़े शूटरों को जांच की जद में रखा गया है।

बजरंगी के आर्थिक साम्राज्य पर सीधी चोट

लंबे समय से मुन्ना बजरंगी जेल में निरुद्ध है लेकिन रीयल स्टेट से लेकर ठेकों का काम बाहर चलता है। पहले आर्थिक मामलों को साला पुष्पजीत उर्फ पीजे देखता था और उसकी हत्या के कमान तारिक ने संभाल ली थी। आशंका जतायी जा रही है कि बजरंगी के आर्थिक साम्राज्य पर सीधी चोट पहुंचाने के साथ उसकी हनक कम करने के लिए विरोधी गुट ‘मैनेजरो’ को निशाने पर रखे है। गिरोह के बारे में सब कुछ जानने वाला ही ऐसा कर सकता है। जेल से बाहर का सेतु टूटने से बजरंगी पर असर पड़ेगा और विरोधी गुट ऐसा ही चाह रहा है।

ठेके समेत दूसरे विवादों की भी जांच

झांसी जेल में बजरंगी से मिलने वालों से लेकर पूर्वांचल के सफेदपोशों पर पुलिस नजर रखी है। एसटीएफ ने तारिक के मोबाइल से सौ से अधिक नंबरों की पड़ताल शुरू कर दी है जो सम्पर्क में रहे थे। इसमें से पूर्वांचल के नंबरों को चिह्नित कर उन्हें खंगाला जा रहा है। आजमगढ़ के आपराधिक पृष्टभूमि वाले ब्लाक प्रमुख से लेकर गाजीपुर व मीरजापुर जेल तक निरुद्ध लोगों के बारे में जांच की जा रही है। सरकारी ठेकों से लेकर जमीन समेत दूसरे विवादों की अलग से पड़ताल की जा रही है। पुलिस का दावा है कि जल्द चौंकाने वाला खुलासा होगा।

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