वाराणसी। जिस समय एडीजी (कानून-व्यवस्था) आनंद कुमार एसटीएफ के कामकाज की समीक्षा कर रहे थे उस दौरान एक टीम अपने टास्क में जुटी थी। काशी से रवानगी के पहले उन्हें मैसेज मिल गया कि मिशन पूरा हो गया तो उन्होंने टीम को बधाई दी। दरअसल करंंडा (गाजीपुर) में आरएसएस कार्यकर्ता और पत्रकार राजेश मिश्र की दुस्साहसिक हत्या का मामला काफी समय से पुलिस के गले की फांस बना था। एसटीएफ ने वारदात को अंजाम देने वाले 15 हजारा इनामी को दबोचा तो कई चौंकाने वाले राज खुले। गिरफ्तार रवि यादव उर्फ दिग्विजय उर्फ अजय पांडेय उर्फ बद्री उर्फ सुनील वर्मा पलामू के आसपास एक नहीं बल्कि चार हत्याओं को अंजाम दे चुका है। यहीं नहीं उसने अपना फर्जी आधार बनवा रखा था जिसके आधार पर नकली नाम से जमानत भी ले ली।

माफिया विकास दूबे का दाहिना हाथ

मूल रूप से लोनेपुर करंडा (गाजीपुर) का निवासी रवि यादव पिछले काफी समय से गया था रांची झारखंड डालटनगंज पलामू इलाके के माफिया विकास दुबे के शार्प शूटर और लेफ्टीनेंट के रूप में वारदातों को अंजाम देता रहा है। झारखंड में हत्या, हत्या प्रयास और रंगदारी वसीली जैसे सनसनीखेज मामलों के आरोपित रवि ने पिछले साल दीपावली के समय पत्रकार को मौत के घाट उतार दिया था। इसके बाद वह पलामू चला गया। एसएसपी एसटीएफ अभिषेक सिंह ने पूर्वांचल के फरार इनामिया अपराधियों के टास्क के क्रम में एएसपी एस आनंद व डिप्टी एसपी विनोद सिंह को गिरफ्तारी के निर्देश दिये थे। इंस्पेक्टर शैलेश सिंह ने टीम के साथ हल्की मुठभेड में दबोचा। तलाशी में 9 एमएम पिप्टल-कारतूस के अलावा सुनील वर्मा के नाम से फर्जी आधार कार्ड भी बरामद हुआ है।

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