पीएम के ड्रीम प्रोजेक्ट में इस तरह लग रही ‘सेध’, शासन ने नोटिस देकर मांगा जवाब तो आला अफसरों के होश ‘फाख्ता’

बलिया। ‘स्वच्छ भारत अभियान’ पीएम मोदी की वह महत्वाकांक्षी योजना है जिसका जिक्र हर रैली व सभा में होत है। समूचे देश भर में साफ-सफाई व स्वचछता का पुरजोर अभियान चल रहा है। योजना पर अरबों रुपये खर्च किए जा चुके हैं। बावजूद इसके जनपद के गांवों में लोग अब भी गंदगी के बीच ही जीवन गुजारने को विवश हैं। यहां विभिन्न गांवों में बजबजाती नालियां, कूड़े से पटी गलियां व शौचालय के रूप में इस्तेमाल हो रहे मुख्य मार्ग आज भी इस अभियान को मुंह चिढ़ा रहे हैं। यह किसी विरोधी दल के आरोप नहीं बल्कि इसका खुलासा करते हुए स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) पंचायती राज उत्तर प्रदेश के मिशन निदेशक डा. ब्रम्हदेव राम तिवारी ने जिला पंचायतराज अधिकारी को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।

जिला प्रशासन की खुली कलई, नहीं सूझ रही सफाई

मिशन निदेशक की नोटिस में चौकाने वाली बात यह है कि इस योजना में जिला प्रशासन का झूठ सामने आया है। दरअसल बलिया में 1844 ग्राम ओडीएफ घोषित किये गये थे लेकिन मंडलीय उप निदेशक व मंडलीय टीमों की जांच में 1094 ग्राम ओडीएफ के मानक पर खरा नहीं मिले। इस वजह से 1094 ग्रामों को दिया गया ओडीएफ प्रमाण पत्र निरस्त किया जाता है, जो लक्ष्य का 59.़33 प्रतिशत है। निदेशक ने इतने बड़े स्तर पर गांवों के निरस्त होने पर चिन्ता जाहिर करते हुए कहा है कि इससे स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के मूल उद्देश्यों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। जिसके लिए डीपीआरओ जिम्मेदार हैं। निदेशक ने डीपीआरओ को तीन दिन के अंदर अपना स्पष्टीकरण देने को कहा है अन्यथा की स्थिति में विभागीय कार्रवाई की चेतावनी दी है। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि जिस योजना को लेकर केन्द्र सरकार इतनी संवेदनशील हो उस योजना की हालत ऐसी है तो अन्य योजनाओं का हश्र क्या होगा, सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है।

सही जांच हुई तो सामने आयेगा बड़ा घोटाला

लोगों ने दावे के साथ कहा कि यदि ओडीएफ घोषित गांवों की निष्पक्षता से जांच कर दी जाए तो शायद सदी का सबसे बड़ा घोटाला सामने आ सकता है। खुले में शौचमुक्त करने के लिए अरबो रूपए की राशि खर्च होने के बावजूद भी बड़ी संख्या में लोग खुले में शौच करने के लिए जा रहे हैं लेकिन विभागीय रजिस्टर में उसे ओडीएफ घोषित कर दिया गया है। सवाल यह है कि जिस योजना को लेकर केन्द्र सरकार इतनी संवेदनशील हो उस योजना की हालत ऐसी है तो अन्य योजनाओं का हश्र क्या होगा, सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है।

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