जिसने ‘नेतागिरी’ सिखायी उसी सरयू पाण्डेय के पुत्र का मुकाबला करेंगे अफजाल भाई, मनोज सिन्हा भी देते हैं इनकी दुहाई

गाजीपुर। अंसारी परिवार के अफजाल अंसारी पिछले साढ़े दशक से जनपद की राजनीति का अहम चेहरा है। पांच बार विधानसभा और एक बार लोकसभा के सदस्य रह चुके अफजाल अब तक गर्व से बताया करते थे कि वह कामरेड सरजू पाण्डेय के शिष्य हैं। स्व. सरजू पाण्डेय एक ऐसे नेता था जिनका सम्मान पंं. नेहरू से लेकर इंदिरा गांधी तक करते थे। पूर्वांचल की आवाज को देश के सर्वोच्च सदन में बेबाकी से रखने वाले सरयू पाण्डेय भले कम्यूनिस्ट पार्टी से आजीवन जुड़े रहे। इस बार सीपीआई ने उनके पुत्र डा. भानु प्रकाश पाण्डेय को मैदान में उतारा है। गठबंधन के प्रत्याशी अफजाल अंसारी ने राजनीति का ककहरा जिससे सीखा उसी के पुत्र के खिलाफ इस दफा चुनाव मैदान में उतरना होगा। भाजपा प्रत्याशी मनोज सिन्हा भी स्व. पाण्डेय की प्रशंसा करते नहीं थकते हैं लेकिन उनका भी इन्ही के पुत्र से मुकाबला है।

कम्यूनिस्ट पार्टी का गढ़ रहा है गाजीपुर

गौरतलब है कि 1957 से 1977 तक सरयू पाण्डेय कम्यूनिस्ट पार्टी के टिकट पर दो बार सांसद और विधायक चुने गये थे। जनपद को कम्यूनिस्ट पार्टी का गढ़ समझा जाता था और सरयू पाण्डेय इसकी आवाज थे। उनके शिष्य के रूप में पहचान बनाने के बाद अफजाल अंसारी ने कम्यूनिस्ट पार्टी से ही अपनी राजनीति शुरू की थी। इसके टिकट पर मोहम्मदाबाद से वह 1984 में पहली बार विधायक चुने गये थे। इसके बाद 1989 और 1993 में भी जीत हासिल की। इसके बाद उनका मोहभंग हुआ तो वह समाजवादी पार्टी में चले गये। अपनी पार्टी कौमी एकता दल का भी गठन किया और पिछले विधानसभा चुनाव से बहुजन समाज पार्टी का हिस्सा है।

कई भाषाओं का ज्ञान, सोशल मीडिया में रहते सक्रिय

डा. भानु प्रकाश पाण्डेय लगभग तीन दशक बाद राजनीति में सक्रिय हो रहे हैं। इससे पहले उन्होंने 1989 में जहूराबाद गाजीपुर से विधानसभा चुनाव निर्दलीय लड़ा था। पीएफ यूनिवर्सिटी मास्को रूसी भाषा शास्त्र में पीएचडी करने वाले डा. पाण्डेय का रुसी में किया हुआ शोध कार्य आज भी रशियन फ्रेंडशिप विश्वविद्यालय मास्को की लाइब्रेरी में उपलब्ध है जिसे रुसी भाषा पढ़ने वाले विद्यार्थी पढ़ते हैं और लाभान्वित होते है। हिन्दी,अंग्रेजी और रूसी धाराप्रवाह बोलने और पढ़न वाले डा. पाण्डेय सोशल मीडिया प्लेटफार्म फेसबुक ट्विटर पर खासे सक्रिय रहते हैं। यही नहीं समाचार पत्रों में सामाजिक विषयों पर सक्रियता से लिखना और समाज के उत्थान में अपना सहयोग देना उनका शगल है। पूर्व प्रधानमंत्री वीपी सिंह ने 1990 में उनका नाम गाजीपुर से चुनाव के लिए प्रस्तावित किया था लेकिन डा. पाण्डेय ने इनकार कर दिया था।

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