वाराणसी। सूबे के सीएम योगी आदित्यनाथ दूसरों से बिल्कुल अलग हैं। प्रदेश के जिस शहर नोएडा में जाने से गद्दी छिनने की आशंका के चलते दूसरा कोई सीएम जाने को तैयार नहीं होता वहां पर योगी दो बार जा चुके हैं। धार्मिक नगरी काशी में चंद्रग्रहण के दौरान मंदिरों के कपाट बंद रहते हैं और सूतक काल में कोई अन्न नहीं ग्रहण करता। सूतक सुबह लगभग 9 बजे आरम्भ हो चुका था जिसमें धर्म शास्त्र के मुताबिक पूजा और भोजन निषेध है। योगी ने काशी प्रवास के दौरान इस परम्परा को तोड़ते हुए खुद तो लंगर छका साथ ही ‘पूजा-पाठ’ करने वाले सहयोगियों को भी ऐसा कराया।

धर्म की रखते हैं जानकारी

सीएम योगी गोरक्षपीठ के महंंत भी हैं जिससे उन्हें दूसरो की तुलना में धर्म की जानकारी अधिक है। चंद्रग्रहण से 9 घंटे पहले सूतक लगने का जिक्र धर्मशस्त्रों में है और ऐसा हो ही नहीं सकता कि योगी को यह पता न हो। बावजूद इसके योगी नयी परम्परा स्थापित करने के लिए जाने जाते हैं और ऐसा ही किया। अलबत्ता प्रोटोकाल में कानून-व्यवस्था की समीक्षा मंडलीय सभागार में होनी थी लेकिन सूतक के चलते इसे नदरंदाज कर दिया।

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