वाराणसी। कर्णघंटा (चौक) में शनिवार की सुबह आभूषण व्यापारी गोपाल सेठ के स्कूटी की डिगी से 80 लाख का कच्चा सोना उड़ाने वाला कोई और नहीं बल्कि उनके साथ आया कारीगर संंदीप सेठ था। लंबे समय से गोपाल सेठ के यहां सोना रिफाइन करने का काम करने वाले संदीप कुछ माह पहले पगार बढाने के लिये कहा तो गोपाल के भाई हरिशंकर सेठ व उनके लड़के रवि सेठ ने मार्केट में ही चोरी का आरोप लगाते हुए संदीप की न सिर्फ पिटाई की बल्कि बेइज्जत किया। इसका बदला लेने के लिये संदीप अपने मित्र सागर के साथ मुकेश सेठ जिसकी दुकान गोपाल की दुकान के सामने है से मिल कर चोरी की योजना बनायी। एसएसपी आनंद कुलकर्णी ने मंगलवार को एक किलो सोने के साथ पकड़े गये आरोपितों को मीडिया के सामने पेश करते हुए सिलसिले वार पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी। साथ ही खुलासा करने वाली क्राइम ब्रांच की टीम के राकेश सिंह तथा इंस्पेक्टर चौक को पुुरस्कृत किया।

कुछ यूं रहा था पूरा घटनाक्रम

एसएसपी के मुताबिक मुकेश ने अपने भाई रूपेश जो ढाई दर्जन से अधिक संगीन मामलों का आरोपित है से बात की। संदीप से कहा कि जिस गाड़ी में सोना लाते हो उसकी डिग्गी की चाभी बनवा लो और एक सिम की व्यवस्था कर लो। संदीप और सागर ने डिग्गी की चाभी बनवा ली। वारदात के एक दिन पहले मुकेश ने संदीप व सागर को अपने घर ले जाकर रूपेश से मिलवाया और चाभी और सिम संदीप ने रूपेश को दे दिया। वही बैठ कर हम लोग व रूपेश, मोहित, बृजेश जायसवाल व मुकेष की पत्नी पिंकी ने घटना की योजना बनायी। तय हुआ कि जब संदीप घर से माल लेकर दुकान के लिये निकलेगा तो जो सिम दिया है उस नम्बर पर काल कर देगा। रूपेश ने संदीप को दो लाख व सागर को 50 हजार रुपये दिये और कहा कि बाकी हिसाब काम होने के बाद होगा। योजना के तहत घटना को अंजाम दिया गया। मुकेष के भाई बृजेश सेठ ने मोटरसाइकिल की व्यवस्था की। डुप्लीकेट चाबी की व्यवस्था के बाावजूद संदीप ने डिग्गी को खुला भी छोड़ दिया गया था जिससे कार्य आसानी से हो सके। रूपेश ने मुकेश व बृजेश उर्फ बाबू को उनके हिस्से का सोना दे दिया था जिसने बेचने के लिये जाने की तैयारी में थे कि पकड़े गये।

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