वाराणसी। देश की धार्मिक और सांस्कृतिक नगरी काशी नगरी सैकड़ों साल पुरानी है। यहां महादेव को मानने वाले रहते हैं जिनके लिए शव सम्मान का प्रतीक माना जाता है। उन्ही का असर माना जाये या कुछ और लेकिन किसी का शव देखने के बाद सिर ढक लिया जाता है। साथ ही कंधा देना तो धार्मिक कृत्य नहीं बल्कि परम्परा का हिस्सा है। पुलिस के नये नियमों के बाद यह सब पुरानी बाते हो जायेगी। एसपी ट्रैफिक ने जो फरमान जारी किया है उससे कंधा देना तो दूर सुबह से शाम तक लोग राम नाम सत्य तक नहीं सुन सकेंगे। धार्मिक कृत्यों के तहत पिंडा पारने के नये स्थानों की तलाश होगी। साथ ही जब भीषण गर्मी और कड़ाके की ठंड में मौत का सिलसिला आरम्भ होता है तो शव को ले जाना भी एक बड़ी चुनौती रहेगा।

ट्रैफिक के नाम पर किया जा रहा है बदलाव

एसपी ट्रैफिक के मुताबिक इस समय में शहर में मैदागिन से चौक के बीच वाहनों का भारी दबाव रहता है। हरिश्चन्द्र महाविद्यालय के पास शव लाने वाले वाहनों की पार्किंग होने के कारण प्राय: जाम की स्थिति उत्पन्न रहती है तथा अन्य वाहनों की पार्किंग भी नहीं हो पाती है, जिसके कारण आम-जनमानस को अत्यन्त असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। शवों को लेकर आने वाले वाहन प्राय: चौकाघाट, लहुराबीर, गोलगड्डा तिराहा, भदऊ चंगी, भैंसासूर तिराहा सहित अन्य मार्गों से आते जाते हैं, जिससे आवागमन भी प्रभावित होता है। दूसरी तरफ भैंसापुर से मणिकर्णिका घाट शवों को ले जाने हेतु शुधांशु मेहता फाउन्डेशन द्वारा 4 जल शव वाहिनी की नि:शुल्क व्यवस्था की गयी है, जो पिछले लगभग एक वर्ष से नि:शुल्क जल शव वाहिनियों का संचालन कर रहे हैं। जिनसे लगभग 40 से 50 शव प्रतिदिन वर्तमान में भी भैंसासुर घाट से मणिकर्णिका घाट ले जाकर सम्मानपूर्वक अंतिम संस्कार कराया जा रहा है। जिसमें शवों के साथ आये लोगों को भी भैंसासूर घाट से मणिकर्णिका घाट तक लाने एवं मणिकर्णिका घाट से भैंसासूर घाट तक ले जाने हेतु सम्मानजनक एवं नि:शुल्क व्यवस्था की गयी है। भैसासूर घाट पर वाहनों के पार्किंग की भी पर्याप्त व्यवस्था की गयी है।

सुबह से शाम तक लगायी गयी रोक

इन परिस्थितियों एवं आम-जनमानस को हो रही असुविधा को दृष्टिगत रखते हुए मैदागिन पर तथा मैदागिन की तरफ से मणिकर्णिका घाट पर अंतिम संस्कार हेतु शवों को लेकर आने-जाने वाले वाहनों पर आवागमन के सम्बन्ध में गुरुवार की सुबह 9 बजे से शाम 6 बजे तक तत्काल प्रभाव से रोक लगायी जाती है। साथ ही साथ अंतिम संस्कार हेतु मणिकर्णिका घाट पर आने वाले समस्त प्रकार के वाहन चाहे वह किसी तरफ से आकर चौकाघाट होते हुए लकड़मण्डी, गोलगड्डा तिराहा होकर भदऊचुंगी से भैंसासूर घाट पर पहुंचेगें। यहां पर शव लेकर आये वाहन को पार्क कराते हुए भैसासूर घाट पर मौजूद शव जल वाहिनी के माध्यम से मणिकर्णिका घाट तक नि:शुल्क पहुँचाया जायेगा तथा उन्हें पुन: वापस नि:शुल्क लाकर भैंसासुर घाट पर छोड़ा जायेगा।

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